जैव विविधता को संजीवनी देने के लिए मधुमक्खियों का सहारा लिया जाएगा। मधुमक्खियों की कम होती तादाद को देखते हुए वन विभाग ने हर्बल गार्डन में 35 बक्से लगाए हैं। यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे वन पंचायत की मदद से पूरे क्षेत्र में आगे बढ़ाया जाएगा। वन विभाग कि यह नई पहल पिछले कई दशकों में प्रकृति को हुए नुकसान की भरपाई करने में मददगार साबित हो सकेगी।
विशेषज्ञों की मानें तो 30 प्रतिशत फसलें और लगभग 80 प्रतिशत पेड़-पौधे बढ़कर फल और बीज उत्पन्न होने में परागण का इस्तेमाल करते हैं। मधुमक्खियां परागण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है, जब मधुमक्खी किसी एक फूल पर बैठती हैं तो उसके पैरों और पंखों में पराग कण चिपक जाते हैं और जब वह उड़कर किसी दूसरे फूल पर बैठती है, तब यह पराग कण उस पौधे में चले जाते हैं। इससे फल और बीजों की उत्पत्ति होती है। लेकिन मानवीय गतिविधियां और आपदा सहित विभिन्न कारणों से मधुमक्खियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने जैव विविधता के संरक्षण की योजना बनाई है।