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भू-धंसाव से लगातार बिगड़ रहे मलाऊं के हालात
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 04 Jan 2017 10:08 PM IST
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के ग्राम पंचायत फलासी का मलाऊं गांव, तीन वर्ष से झेल रहा भू-धंसाव का दंश। घरों के आंगन इस तरह से धंस रहे हैं गांव में।
- फोटो : amar ujala.
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के ग्राम पंचायत फलासी का मलाऊं गांव तीन वर्ष से भू-धंसाव का दंश झेल रहा है। बरसात के बाद से यहां की स्थिति दयनीय बनी हुई है। गांव के अधिकांश आवासीय घरों के आंगन धंसे हुए हैं। बावजूद गांव की सुरक्षा के लिए आज तक कोई कार्य नहीं हो पाया है। छह माह पूर्व प्रशासन की टीम भी यहां स्थिति का जायजा ले चुकी है।
54 परिवारों वाले मलाऊं गांव जहां आपदा की मार से बुरी तरह से बेहाल है। वहीं, शासन, प्रशासन तेजी से बिगड़ रहे हालातों को अनदेखा कर रहा है। गांव के दोनों तरफ जमीन धंस रही है, जिस कारण कई घरों के चौक दो से चार फिट तक धंस चुके हैं। मकानों की बुनियाद भी अपनी जगह छोड़ रही है और भवनों पर चौ तरफा दरारें हैं, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।
पीड़ित महावीर सिंह, दर्शन सिंह, पदमेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, जयपाल सिंह, गिरीश सिंह आदि बताते हैं कि बीते 6 वर्ष से हल्की बारिश में भी घर छोडना नियती बन चुकी है। दरारों से पटे भवनों की कई बार मरम्मत करा चुके हैं। लेकिन हालात सुधरने के बजाय बिगड़ रहे हैं। बरसाती सीजन में अन्यत्र शरण लेना मजबूरी हो गई है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रदीप सिंह करासी और ग्राम प्रधान बीना देवी का कहना है कि वर्ष 2014 में शुरू हुआ भू-धंसाव अब विकराल हो गया है। दो बार का भू-गर्भीय सर्वेक्षण भी हुआ। लेकिन न तो सुरक्षा कार्य हुए और न विस्थापन। बीते जुलाई माह में तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। लेकिन आश्वासन से अधिक कुछ नहीं मिला। दूसरी तरफ ग्राम पंचायत कुंडा-दानकोट का धौकनी तोक भी भू-धंसाव की मार झेल रहा है।
वर्ष 2011 से यहां के हालात निरंतर बिगड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी चरण सिंह मेहता बताते हैं, शासन, प्रशासन को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है। जिला पंचायत सदस्य योगम्बर सिंह नेगी का कहना है कि मलाऊं व धौकनी गांव की सुरक्षा को कोई इंतजाम नहीं हो रहे हैं। शासन, प्रशासन को कई बार स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन आज तक आश्वासन से अधिक कुछ नहीं हुआ है।
बीते वर्ष जुलाई माह में मलाऊं और धौकनी गांव का प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण किया था। जो रिर्पोट टीम ने भेजी थी, उसे शासन को भेजा गया था। शासन से दोनों गांवों के पुन: भू-गर्भीय सर्वेक्षण के निर्देश मिले हैं। इन दोनों गांवों के 14-14 परिवारों को विस्थापन होना है। जल्द ही विशेषज्ञों के साथ पुन: भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जाएगा।
--- मुक्ता मिश्र, एसडीएम सदर, रुद्रप्रयाग
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54 परिवारों वाले मलाऊं गांव जहां आपदा की मार से बुरी तरह से बेहाल है। वहीं, शासन, प्रशासन तेजी से बिगड़ रहे हालातों को अनदेखा कर रहा है। गांव के दोनों तरफ जमीन धंस रही है, जिस कारण कई घरों के चौक दो से चार फिट तक धंस चुके हैं। मकानों की बुनियाद भी अपनी जगह छोड़ रही है और भवनों पर चौ तरफा दरारें हैं, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।
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पीड़ित महावीर सिंह, दर्शन सिंह, पदमेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, जयपाल सिंह, गिरीश सिंह आदि बताते हैं कि बीते 6 वर्ष से हल्की बारिश में भी घर छोडना नियती बन चुकी है। दरारों से पटे भवनों की कई बार मरम्मत करा चुके हैं। लेकिन हालात सुधरने के बजाय बिगड़ रहे हैं। बरसाती सीजन में अन्यत्र शरण लेना मजबूरी हो गई है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रदीप सिंह करासी और ग्राम प्रधान बीना देवी का कहना है कि वर्ष 2014 में शुरू हुआ भू-धंसाव अब विकराल हो गया है। दो बार का भू-गर्भीय सर्वेक्षण भी हुआ। लेकिन न तो सुरक्षा कार्य हुए और न विस्थापन। बीते जुलाई माह में तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। लेकिन आश्वासन से अधिक कुछ नहीं मिला। दूसरी तरफ ग्राम पंचायत कुंडा-दानकोट का धौकनी तोक भी भू-धंसाव की मार झेल रहा है।
वर्ष 2011 से यहां के हालात निरंतर बिगड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी चरण सिंह मेहता बताते हैं, शासन, प्रशासन को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है। जिला पंचायत सदस्य योगम्बर सिंह नेगी का कहना है कि मलाऊं व धौकनी गांव की सुरक्षा को कोई इंतजाम नहीं हो रहे हैं। शासन, प्रशासन को कई बार स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन आज तक आश्वासन से अधिक कुछ नहीं हुआ है।
बीते वर्ष जुलाई माह में मलाऊं और धौकनी गांव का प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण किया था। जो रिर्पोट टीम ने भेजी थी, उसे शासन को भेजा गया था। शासन से दोनों गांवों के पुन: भू-गर्भीय सर्वेक्षण के निर्देश मिले हैं। इन दोनों गांवों के 14-14 परिवारों को विस्थापन होना है। जल्द ही विशेषज्ञों के साथ पुन: भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जाएगा।
--- मुक्ता मिश्र, एसडीएम सदर, रुद्रप्रयाग