फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   Trader, protest against night curfew and encroachment campaign

साप्ताहिक बंदी, रात्रि कर्फ्यू और अतिक्रमण अभियान का होगा विरोध

Mon, 30 Nov 2020 11:14 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 11:14 PM IST
विज्ञापन
Trader, protest against night curfew and encroachment campaign
रुड़की। ‘बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए व्यापारी जिम्मेदार नहीं हैं। पहले जरूरत से ज्यादा ढील दी गई। अब मामले बढ़े तो साप्ताहिक बंदी न करने और रात्रि आठ बजे के बाद दुकान खुली होने पर चालान की कार्रवाई व्यापारियों का शोषण है। रात्रि कर्फ्यू जैसे कदम और चंद घंटों की पाबंदी से कोरोना तो मिटेगा नहीं, लेकिन व्यापारियों और आम नागरिक को कितनी तकलीफ होगी, इसका अंदाजा न तो प्रशासन को है और न ही सरकार को।’ यह कहना है व्यापारी नेताओं और दुकानदारों का। बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर धीरे-धीरे लागू की जा रहीं पाबंदियों के विरोध में स्थानीय व्यापारी लामबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें बिना उनकी राय के प्रतिबंध लागू हुए तो पुरजोर विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन

--
नगर निगम ने की है बाजारों में अतिक्रमण हटाने की घोषणा
नगर निगम प्रशासन ने पिछले दिनों बाजारों से अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापारियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान एक दिसंबर से सिविल लाइंस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन कोरोना काल में निगम की इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारी लामबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि शहर में किसी संगठन से न तो वार्ता की गई और न ही राय मशविरा किया गया है। ऐसे में अगर नगर निगम प्रशासन एकतरफा कार्रवाई करता है तो उसका विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन

--
कोरोना को लेकर सरकार किसी भी तरह के प्रतिबंध लागू करती है तो उसका विरोध किया जाएगा। चंद घंटों की पाबंदी से व्यापारियों का शोषण करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका पुरजोर विरोध होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-शानू छाबड़ा, व्यापारी
--
सरकार रात्रि कर्फ्यू लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन रात्रि में केवल जरूरतमंद लोग ही सड़कों पर लगते हैं। बाजार बंद रहते हैं। ऐसे में रात्रि के कर्फ्यू लगाने का कोई औचित्य नहीं है। इससे परेशानी बढ़ेगी।
-आदर्श कपानिया, व्यापारी
--
एकतरफा अतिक्रमण हटाने के अभियान का विरोध किया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापारी वर्ग से पहले बातचीत होनी चाहिए। सहमति से अतिक्रमण चिह्नित होेने के बाद ही कार्रवाई होनी चाहिए।
-रामगोपाल कंसल, व्यापारी
--
साप्ताहिक बंदी पर चालान काटने की कार्रवाई से व्यापारियों का शोषण हो रहा है। व्यापारी पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। दुकानों पर ग्राहक नहीं हैं, उल्टे चालान की कार्रवाई से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
-नितिन शर्मा, व्यापारी
--
किसी तरह की पाबंदी से सबसे ज्यादा असर व्यापारी पर पड़ता है, लेकिन निर्णय से पहले स्थानीय व्यापारियों की रायशुमारी नहीं की जाती। एकतरफा नियम लागू किए जाते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा।
-विजय गोयल, व्यापारी
--
प्रशासन को पहले व्यापारियों को विश्वास में लेना चाहिए। कोरोना काल में पहले ही व्यापारी भारी नुकसान उठा चुके हैं। किसी तरह की पाबंदी पटरी पर लौट रही व्यवस्था को फिर से बिगाड़ सकती है।
-चौधरी धीर सिंह, व्यापारी
--
सरकार और प्रशासन को बाजार बंद करने और कर्फ्यू लगाने जैसे नियमों को लागू करने के बजाय सैनिटाइजेशन, मास्क का प्रयोग और शारीरिक दूरी का पालन कराने जैसे नियमों पर जोर देना चाहिए।
-दीपक अरोड़ा, व्यापारी
--
रात्रि कर्फ्यू और साप्ताहिक बंदी जैसे नियमों से कोरोना की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। पाबंदी की जगह बाजारों में कोरोना से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
-कविश मित्तल, व्यापारी
--
लॉकडाउन के दौरान पूरे संयम के साथ व्यापारियों ने साथ दिया। इसके बाद बाहरी लोगों को खुली छूट देने से कोरोना बढ़ा है, लेकिन अब स्थानीय व्यापारियों को इसकी और सजा नहीं दी जा सकती।

-रतन अग्रवाल, व्यापारी
--
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि दुकानों और बाजारों में व्यक्तिगत स्वच्छता व शारीरिक दूरी के नियमों को लेकर अभियान चलाए। पाबंदियों से कोरोना समाप्त नहीं होगा, उल्टे व्यापारियों को नुकसान होगा।
-अजय गुप्ता, व्यापारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed