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हड़ताल के चलते मरीजों की नहीं हो सकी जांचें

Mon, 08 Nov 2021 08:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 08:24 PM IST
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Due to the strike, the investigation was not done in the civil hospital
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की पूर्व निर्धारित हड़ताल के चलते सिविल अस्पताल में मरीजों को खून और अन्य जांचों के साथ ही एक्सरे के लिए भी भटकना पड़ा। कुछ मरीजों को मजबूरी में निजी लैब में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ी। जबकि, 100 से अधिक मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कर्मचारियों ने नौ सूत्री मांगों को लेकर चार माह पहले हड़ताल की थी। कुछ मांगें नहीं माने जाने पर कर्मचारियों ने आठ नवंबर को देहरादून में हड़ताल की चेतावनी दे थी। रुड़की के सिविल अस्पताल में पैथोलॉजी लैब, डीईआईसी, डिजिटल एक्स-रे आदि में एनएचएम के 28 डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी तैनात हैं। सोमवार को संगठन के आह्वान पर अस्पताल के सभी एनएचएम कर्मचारी धरना-प्रदर्शन में शामिल होने देहरादून सचिवालय पहुंचे। संगठन की रुड़की शाखा अध्यक्ष रोशनी नौटियाल ने बताया कि एनएचएम कर्मी अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी एचआर पॉलिसी लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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इसके अलावा मेडिकल और नॉन मेडिकल स्टॉफ की अलग-अलग श्रेणी निर्धारित करने सहित उनकी चार मांगें हैं। वहीं, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल का सिविल अस्पताल के मरीजों पर असर पड़ा। यहां बच्चों की डीईआईसी और पैथोलॉजी लैब प्रभावित हुई। लैब में स्टाफ नहीं होने से जांच नहीं हो पाई। ऐसे में मरीजों को या तो निराश लौटना पड़ा या फिर उन्हें महंगे दामों पर निजी लैब में जांच करवानी पड़ी। इसके अलावा टीबी की जांच और डिजिटल एक्सरे भी नहीं हो पाए। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि एनएचएम के स्टाफ के हड़ताल पर जाने से कुछ मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी है। फिर भी प्रयास किया गया कि मरीज ज्यादा परेशान न हों।
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जल्द शुरू हो सकती है डायलिसिस की सुविधा
सिविल अस्पताल में जल्द किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस की सुविधा शुरू होने की उम्मीद है। यदि ये सुविधा अस्पताल में शुरू होती है तो मरीजों को देहरादून और दूसरे शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दरअसल, डायलिसिस की जरूरत किडनी के मरीजों को सबसे ज्यादा पड़ते हैं। इसमें मरीज के शरीर से खून निकालकर उसे मशीन से फिल्टर किया जाता है। इसके बाद वापस मरीज के शरीर में चढ़ा दिया जाता है। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि अभी तक डायलिसिस करवाने के लिए मरीजों को देहरादून और मेरठ सहित अन्य जगह जाना पड़ता है। लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे कि अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा मिल सके। अब इसकी उम्मीद जगी है। जल्द ही अस्पताल में डायलिसिस मशीन पहुंच जाएगी। इसके बाद स्टाफ मिलते ही मरीजों की डायलिसिस शुरू हो जाएगी।
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