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बार्डरों पर दिन में नहीं होती चेकिंग
Updated Sun, 08 Apr 2018 12:08 AM IST
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रुड़की। जिले में बार्डर पर बनीं चौकियां महज शोपीस बनकर रह गई हैं। आलम यह है कि इन चौकियों में दिन के समय कोई चेकिंग नहीं की जाती। ऐसे में कोई भी बाहरी व्यक्ति आराम से घटना को अंजाम देकर बार्डर पा कर लेता है।
बिजनौर बार्डर से सटे बालावाली क्षेत्र में खानपुर थाने की अस्थायी चौकी है, लेकिन यहां पर दिन के समय किसी प्रकार की चेकिंग नहीं होती। यदि कोई असलहा लेकर आ रहा हो तो उसके बैग की भी चेकिंग नहीं की जाती। यही हाल भगवानपुर थाना क्षेत्र के मंडावर और काली नदी चेक पोस्ट का है। इन चौकियों में एक दारोगा और चार सिपाही तैनात रहते हैं, लेकिन दिन के समय किसी प्रकार की चेकिंग नहीं की जाती। झबरेड़ा से लगे सहारनपुर जिले के बार्डर लखनौता चौकी में आठ सिपाही और एक दारोगा तैनात रहते हैं, लेकिन दिन में किसी भी प्रकार की चेकिंग नहीं की जाती। यही हाल सहारनपुर-झबरेड़ा मार्ग का है। यहां पर पुलिस की ओर से जो चैक पोस्ट बना रखी उस पर कभी पुलिस के जवान बैठते नहीं। जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस चैक पोस्ट पर जवानों की तैनाती मांग कर चुके हैं। ऐसे में रुड़की क्षेत्र में कोई भी वारदात करने के बाद अपराधी इस मार्ग से आसानी से सहारनपुर जिले में दाखिल हो जाते हैं।
दिन में नहीं दिखते पुलिस के जवान
शहर में कुछ स्थानों को छोड़ दिया जाए तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी पोस्ट पर अलर्ट नहीं दिखते। ऐसे में शहर में यातायात संभालने के लिए होमगार्ड और यातायात पुलिस के जवान ही दिखते हैं। रेगुलर पुलिस की ड्यूटी जहां पर लगाई जाती है वह दिखते ही नहीं या तो वे किसी ठेले की ओट में बैठकर मोबाइल में उलझे रहते हैं या फिर मोबाइल पर चेट करने में व्यस्त रहते हैं। पुलिस की गाड़ी का हुटर सुनकर ही यह सड़क या पोस्ट पर सक्रिय होते हैं। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मंगलौर चेक पोस्ट पर संदिग्ध वाहन की सूचना के बाद ही वाहन की चेकिंग की जाती है। यहां पर भी पुलिस के दो जवान दिन में और दो जवान रात में तैनात रहते हैं।
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बिजनौर बार्डर से सटे बालावाली क्षेत्र में खानपुर थाने की अस्थायी चौकी है, लेकिन यहां पर दिन के समय किसी प्रकार की चेकिंग नहीं होती। यदि कोई असलहा लेकर आ रहा हो तो उसके बैग की भी चेकिंग नहीं की जाती। यही हाल भगवानपुर थाना क्षेत्र के मंडावर और काली नदी चेक पोस्ट का है। इन चौकियों में एक दारोगा और चार सिपाही तैनात रहते हैं, लेकिन दिन के समय किसी प्रकार की चेकिंग नहीं की जाती। झबरेड़ा से लगे सहारनपुर जिले के बार्डर लखनौता चौकी में आठ सिपाही और एक दारोगा तैनात रहते हैं, लेकिन दिन में किसी भी प्रकार की चेकिंग नहीं की जाती। यही हाल सहारनपुर-झबरेड़ा मार्ग का है। यहां पर पुलिस की ओर से जो चैक पोस्ट बना रखी उस पर कभी पुलिस के जवान बैठते नहीं। जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस चैक पोस्ट पर जवानों की तैनाती मांग कर चुके हैं। ऐसे में रुड़की क्षेत्र में कोई भी वारदात करने के बाद अपराधी इस मार्ग से आसानी से सहारनपुर जिले में दाखिल हो जाते हैं।
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दिन में नहीं दिखते पुलिस के जवान
शहर में कुछ स्थानों को छोड़ दिया जाए तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी पोस्ट पर अलर्ट नहीं दिखते। ऐसे में शहर में यातायात संभालने के लिए होमगार्ड और यातायात पुलिस के जवान ही दिखते हैं। रेगुलर पुलिस की ड्यूटी जहां पर लगाई जाती है वह दिखते ही नहीं या तो वे किसी ठेले की ओट में बैठकर मोबाइल में उलझे रहते हैं या फिर मोबाइल पर चेट करने में व्यस्त रहते हैं। पुलिस की गाड़ी का हुटर सुनकर ही यह सड़क या पोस्ट पर सक्रिय होते हैं। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मंगलौर चेक पोस्ट पर संदिग्ध वाहन की सूचना के बाद ही वाहन की चेकिंग की जाती है। यहां पर भी पुलिस के दो जवान दिन में और दो जवान रात में तैनात रहते हैं।
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