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दो घंटे की पैरोल पर कुख्यात प्रवीण बाल्मीकि बुआ की तेहरवीं पर रुड़की पहुंचा
Updated Sun, 25 Nov 2018 12:19 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
दो घंटे की पैरोल मिलने के बाद बदमाश प्रवीण वाल्मीकि को चमोली जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच बुआ की तेरहवीं में रुड़की स्थित उसके घर पर लाया गया। यहां पहुंचते ही उसके आसपास परिजनों का जमावड़ा लग गया। पुलिस ने उसे एक कमरे में बैठाकर खाना खिलाया और दो घंटे के बाद दोपहर करीब 12 बजे पुलिस उसे लेकर चमोली रवाना हो गई।
कड़ी सुरक्षा के बीच शनिवार दोपहर 12 बजे प्रवीण वाल्मीकि अपनी बुआ की तेरहवीं में शामिल होने नई बस्ती स्थित अपने आवास पहुंचा। प्रवीण ने कोर्ट से तीन दिन की पैरोल मंागी थी, लेकिन दो घंटे की उसकी पैरोल मंजूर की गई। प्रवीण वाल्मीकि के बचपन में ही उसके माता-पिता की मौत हो गई थी। प्रवीण उसके भाई बोवी और वीनू अपनी बुआ के साथ रहते थे। तीनों की देखभाल उसकी बुआ ही करती थी। प्रवीण के जेल में बंद होने के बाद उसकी बुआ ही उसकी पैरोकारी करती थी।
प्रवीण का बुआ के साथ खासा लगाव था। वह बुआ को ही अपनी मां मानता था। प्रवीण की बुजुर्ग बुआ की बीते दस नवंबर को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। प्रवीण ने दाह संस्कार करने के लिए कोर्ट में अर्जी देकर पैरोल मांगी थी, लेकिन उसका पैरोल मंजूर नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने तेरहवीं में शामिल होने के लिए प्रवीण को तीन दिन की जगह दो घंटे की पैरोल दी थी। दोपहर 12 बजे घर पहुंचने के बाद उसे दो बजे वापस चमोली ले जाया गया। इस दौरान गंगनहर पुलिस के अलावा स्थानीय सूचना विभाग भी अलर्ट था। कोतवाली प्रभारी प्रदीप बिष्ट ने बताया कि प्रवीण को परिजनों से मिलाने के बाद पुलिस कड़ी सुरक्षा में वापस चमोली लेकर चली गई।
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दो घंटे की पैरोल मिलने के बाद बदमाश प्रवीण वाल्मीकि को चमोली जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच बुआ की तेरहवीं में रुड़की स्थित उसके घर पर लाया गया। यहां पहुंचते ही उसके आसपास परिजनों का जमावड़ा लग गया। पुलिस ने उसे एक कमरे में बैठाकर खाना खिलाया और दो घंटे के बाद दोपहर करीब 12 बजे पुलिस उसे लेकर चमोली रवाना हो गई।
कड़ी सुरक्षा के बीच शनिवार दोपहर 12 बजे प्रवीण वाल्मीकि अपनी बुआ की तेरहवीं में शामिल होने नई बस्ती स्थित अपने आवास पहुंचा। प्रवीण ने कोर्ट से तीन दिन की पैरोल मंागी थी, लेकिन दो घंटे की उसकी पैरोल मंजूर की गई। प्रवीण वाल्मीकि के बचपन में ही उसके माता-पिता की मौत हो गई थी। प्रवीण उसके भाई बोवी और वीनू अपनी बुआ के साथ रहते थे। तीनों की देखभाल उसकी बुआ ही करती थी। प्रवीण के जेल में बंद होने के बाद उसकी बुआ ही उसकी पैरोकारी करती थी।
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प्रवीण का बुआ के साथ खासा लगाव था। वह बुआ को ही अपनी मां मानता था। प्रवीण की बुजुर्ग बुआ की बीते दस नवंबर को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। प्रवीण ने दाह संस्कार करने के लिए कोर्ट में अर्जी देकर पैरोल मांगी थी, लेकिन उसका पैरोल मंजूर नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने तेरहवीं में शामिल होने के लिए प्रवीण को तीन दिन की जगह दो घंटे की पैरोल दी थी। दोपहर 12 बजे घर पहुंचने के बाद उसे दो बजे वापस चमोली ले जाया गया। इस दौरान गंगनहर पुलिस के अलावा स्थानीय सूचना विभाग भी अलर्ट था। कोतवाली प्रभारी प्रदीप बिष्ट ने बताया कि प्रवीण को परिजनों से मिलाने के बाद पुलिस कड़ी सुरक्षा में वापस चमोली लेकर चली गई।
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