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जनजातियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 21 Oct 2016 10:58 PM IST
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जनजाति मुद्दों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
- फोटो : amarujala
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बीएसएम पीजी कालेज रुड़की के राजनीतिक विज्ञान विभाग की ओर से जनजातीय मुद्दे और सशक्तिकरण के लिए रणनीतियां विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से आए विषय विशेषज्ञों ने जनजातियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं उत्तराखंड मुक्त विवि के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि आज आदिवासियों को उनकी परंपरागत जड़ों से जोड़ने की जरूरत है। अधिक विकास भी उनकी परंपराओं और संस्कृति को नुकसान पहुंचाएगा। पूर्व राज्यमंत्री मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड की जनजातियों के समक्ष चुनौतियां हैं लेकिन राज्य सरकार उनके उत्थान के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि की प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि चिंतनशील विचारों में सभ्य समाज और अन्य के मध्य गंभीर अंतर को समाप्त करना होगा। सभ्य समाजों में पंचशील सिद्धांत को अपनाना होगा। प्रो. अनिल दत्त मिश्रा ने कहा कि विकास के क्रम में आदिवासियों का शोषण बाजारवाद के माध्यम से हो रहा है।
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आदिवासियों के मुद्दे भूमि, जल और जंगल हैं। इनको बचाना होगा। जनजातियों के जानकार डा. सुभाष वर्मा ने थारू और बोक्सा जनजातियों के बारे में कहा कि वहां का महिला प्रधान समाज महिला सशक्तिकरण का प्रबल उदाहरण प्रस्तुत करता है। गोरखपुर से आए प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि समावेशी विकास के लिए लक्ष्य को वोट की राजनीति ने जन्म दिया है। सेमिनार का संचालन डा. राजेश पालीवाल ने किया। इस मौके पर डा. शिखा जैन, सुबोध भंडारी, डा. दीपक डोभाल, डा. कमलेश शर्मा, डा. सुनीता कुमारी, डा. रीमा, डा. पारुल जैन, डा. कामना जैन आदि मौजूद रहे। सेमिनार के समापन पर प्राचार्य डा. वीपी गौतम ने अतिथियों का आभार जताया। सेमिनार में राजस्थान, बंगाल, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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