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जेसीबी के साथ पहुंचा प्रशासन, किसानों के विरोध ने रोके कदम
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:13 AM IST
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रुड़की। पांच जेसीबी और पुलिस टीम के साथ रुड़की बाईपास का निर्माण कार्य शुरू करवाने पहुंचे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को रसूलपुर के ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। ग्रामीण पर्याप्त मुआवजा न मिलने पर कार्य शुरू न करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान अधिकारियों और किसानों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। टीम ने सख्ती दिखाते हुए काम शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन किसान जेसीबी के आगे लेट गए। इससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पीएसी तैनात करते हुए एएसएडीएम भी गांव पहुंचे, लेकिन किसान नहीं माने। इसके बाद चार सदस्यीय किसानों का प्रतिनिधिमंडल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से वार्ता करने पहुंचा, यहां भी किसान उचित मुआवजा दिलाने की मांग पर अड़े रहे।
एनएच-73 पर मंगलौर से सालियर होते हुए रुड़की बाईपास का निर्माण होना है। यह बाईपास सलेमपुर, रसूलपुर, पनियाला, तांशीपुर आसफनगर आदि गांव से होकर निकलेगा, लेकिन इस बाईपास बनाने में मुआवजे को लेकर रसूलपुर के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। रसूलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन को मुआवजा 12 लाख 21 हजार रुपये दिया गया है, जबकि उनके गांव से सटे सलेमपुर के किसानों को मुआवजा 73 लाख 50 हजार रुपये दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया जब दोनों गांव की जमीन का सर्किट रेट एक ही तो मुआवजा राशि में इतना अंतर क्यों है। ऐसे में उन्हें भी प्रति बीघा मुआवजा राशि साढ़े 73 लाख रुपये ही दी जाए। इसी मांग को लेकर रसूलपुर के ग्रामीण करीब दो माह से धरना प्रदर्शन कर एनएच को भूमि अधिग्रहण नहीं करने दे रहे हैं।
मंगलवार को एनएच के अधिकारी पुलिस टीम के साथ पांच जेसीबी लेकर रसूलपुर गांव में काम शुरू करवाने पहुंचे। इसकी भनक लगते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विरोध करते हुए जेसीबी के आगे लेट गए। सूचना पर एएसडीएम प्रेमलाल भी मौके पर पहुंच गए। किसानों ने एएसडीएम से कहा कि मामला जिलाधिकारी के कोर्ट में लंबित है। जब तक डीएम स्तर से कोई हल नहीं निकल जाता है तब तब काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। एनएच अधिकारियों ने अपना तर्क रखा कि विभाग से जल्द काम शुरू करने के आदेश मिले हैं। इस दौरान दोनों पक्षों में गहमागहमी हुई। मामला बढ़ता देखकर एएसडीएम ने मौके पर पीएसी बुला ली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एएसडीएम प्रेमलाल ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल के कार्यालय लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान तालिब हुसैन, मजाहिद हसन, मोहम्मद तहसीन, राजकुमार, कमल, राजपाल, महबूब हसन, मुमताल, इरशाद, नवाब, हाजी जमील, मुर्ताजा आदि किसान मौजूद रहे।
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54 किसानों की 150 बीघा जमीन का होना है अधिग्रहण
रुड़की बाईपास बनाने में रसूलपुर के 54 किसानों की 150 बीघा जमीन आ रही है। किसानों का आरोप यह भी है कि एनएच के अधिकारियों ने धोखे से उनसे स्टांप पर हस्ताक्षर करवाए हैं। हस्ताक्षर करते हुए आश्वासन दिया गया था कि उन्हें 12 लाख 21 हजार रुपये के बाद मुआवजे की अन्य धनराशि भी दी जाएगी, लेकिन अब अधिकारी मुआवजा देने से साफ इंकार कर रहे हैं।
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एनएच-73 पर मंगलौर से सालियर होते हुए रुड़की बाईपास का निर्माण होना है। यह बाईपास सलेमपुर, रसूलपुर, पनियाला, तांशीपुर आसफनगर आदि गांव से होकर निकलेगा, लेकिन इस बाईपास बनाने में मुआवजे को लेकर रसूलपुर के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। रसूलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन को मुआवजा 12 लाख 21 हजार रुपये दिया गया है, जबकि उनके गांव से सटे सलेमपुर के किसानों को मुआवजा 73 लाख 50 हजार रुपये दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया जब दोनों गांव की जमीन का सर्किट रेट एक ही तो मुआवजा राशि में इतना अंतर क्यों है। ऐसे में उन्हें भी प्रति बीघा मुआवजा राशि साढ़े 73 लाख रुपये ही दी जाए। इसी मांग को लेकर रसूलपुर के ग्रामीण करीब दो माह से धरना प्रदर्शन कर एनएच को भूमि अधिग्रहण नहीं करने दे रहे हैं।
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मंगलवार को एनएच के अधिकारी पुलिस टीम के साथ पांच जेसीबी लेकर रसूलपुर गांव में काम शुरू करवाने पहुंचे। इसकी भनक लगते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विरोध करते हुए जेसीबी के आगे लेट गए। सूचना पर एएसडीएम प्रेमलाल भी मौके पर पहुंच गए। किसानों ने एएसडीएम से कहा कि मामला जिलाधिकारी के कोर्ट में लंबित है। जब तक डीएम स्तर से कोई हल नहीं निकल जाता है तब तब काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। एनएच अधिकारियों ने अपना तर्क रखा कि विभाग से जल्द काम शुरू करने के आदेश मिले हैं। इस दौरान दोनों पक्षों में गहमागहमी हुई। मामला बढ़ता देखकर एएसडीएम ने मौके पर पीएसी बुला ली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एएसडीएम प्रेमलाल ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल के कार्यालय लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। इस दौरान तालिब हुसैन, मजाहिद हसन, मोहम्मद तहसीन, राजकुमार, कमल, राजपाल, महबूब हसन, मुमताल, इरशाद, नवाब, हाजी जमील, मुर्ताजा आदि किसान मौजूद रहे।
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54 किसानों की 150 बीघा जमीन का होना है अधिग्रहण
रुड़की बाईपास बनाने में रसूलपुर के 54 किसानों की 150 बीघा जमीन आ रही है। किसानों का आरोप यह भी है कि एनएच के अधिकारियों ने धोखे से उनसे स्टांप पर हस्ताक्षर करवाए हैं। हस्ताक्षर करते हुए आश्वासन दिया गया था कि उन्हें 12 लाख 21 हजार रुपये के बाद मुआवजे की अन्य धनराशि भी दी जाएगी, लेकिन अब अधिकारी मुआवजा देने से साफ इंकार कर रहे हैं।