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शहर के लिए बीमारी की जड़, गंगा के लिए अभिशाप बना कूड़े का पहाड़

Sun, 04 Sep 2022 12:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 12:12 AM IST
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The mountain of garbage became a curse for the city and the Ganges
शहर के मध्य में गोविंदनगर स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में पिछले चार दशक से कूड़ा सड़ रहा है। दशकों पुराने कूड़े से शहरवासियों के संक्रमण जनित रोगों का खतरा बढ़ रहा है। वहीं बारिश के साथ पानी के साथ गंगा तक पहुंचने वाली गंदगी नदी की निर्मलता पर भी ग्रहण बन रही है। कूड़ा निस्तारण के लिए कई योजनाएं तैयार हुई, लेकिन आज भी ट्रंचिंग ग्राउंड में जमा कूड़े का पहाड़ शहर की तत्कालीन और मौजूदा सरकारों की नाकामी को बयां कर रहा है।
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शहर में पहले चंद्रभागा नदी किनारे, फिर नटराज चौक और देहरादून ऋषिकेश हाईवे के किनारे जंगल में कूड़ा डाला जाता था। लेकिन जैसे जैसे शहर की आबादी बढ़ी तो कूड़े की मात्रा भी बढ़ती चली गई। वर्ष 1982 में नगरपालिका के दौर में शहर के बीचों बीच गोविंद नगर में खाली भूमि पर कूड़ा डालने की शुरुआत हुई। इस दौरान कूड़ा तो फेंका गया पर उसके निस्तारण के लिए कोई योजना तैयार नहीं की गई।
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करीब 36 सालों तक पालिका प्रशासन और शहर की सरकार सोती रही। इस बीच ट्रंचिंग ग्राउंड में 3.24 लाख मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो गया। 40 साल पुराने और रोजाना ट्रंचिंग ग्राउंड में आने वाले नए कूड़े से भयंकर दुर्गंध होती है। आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में तो लोगों दुर्गंध के चलते खिड़की दरवाजे बंद रखते हैं। कूड़ा निस्तारण के आसपास होकर जाने वाले लोग नाक बंद कर निकलते हैं।
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रोजाना निकलता है 100 मीट्रिक टन कूड़ा
शहर में डोर टू डोर कूड़े डोर कूड़ा उठाया जाता है। शहर से रोजाना निकलने वाले कूड़े की मात्रा 100 मीट्रिक टन होती है। कांवड़ यात्रा और चारधाम यात्रा के चरम पर होने पर कूड़े की मात्रा 150 मीट्रिक टन तक पहुंच जाती है। नए कूड़े के निस्तारण के लिए भी नगर निगम के पास कोई कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं है। ऐसे में कूड़े का ढेर लगातार बड़ा हो रहा है।
मार्च तक होना था निस्तारण, डेडलाइन खत्म, पांच महीने और बीते
पुराने कूड़े के निस्तारण के नगर निगम ने एक कंपनी से 8.65 करोड़ रुपये में अनुबंध किया था। कूड़ा निस्तारण काम एक जुलाई 2021 से शुरू होना था और मार्च 2022 तक कंपनी को काम पूरा करना था। लेकिन अब पांच महीने से अधिक बीत चुके हैं। लेकिन ट्रंचिंग ग्राउंड में अब भी 75 फीसदी कूड़ा पड़ा है। कंपनी दावा करती है कि 40 फीसदी कूड़े का निस्तारण कर दिया गया है। लेकिन असल में अब तक 25 फीसदी कूड़े का निस्तारण हुआ है। केंद्र सरकार ने भी पुराने कूड़े के निस्तारण के लिए 6.48 करोड़ रुपये बजट जारी कि कर दिया। लेकिन अब शासन से निगम को बजट जारी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में कूड़ा निस्तारण कंपनी ने भी काम बंद कर दिया है।
प्लांट के लिए अभी करना होगा इंतजार
लालपानी बीट एक में 22 करोड़ की लागत से 10 हेक्टेयर भूमि पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) प्लांट बनना है। वन विभाग की ओर से नगर निगम को भूमि भी हस्तांतरित कर दी गई। निगम और मध्य प्रदेश के भोपाल की नेशनल फार्मर को ऑपरेटिव फेडरेशन के बीच प्लांट के निर्माण और संचालन को लेकर भी सहमति बन गई है। कंपनी को अनुबंध के समय 2.24 करोड़ की बैंक गारंटी जमा करनी है। कंपनी को एक मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए 540 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान किया जाएगा। अगले 10 दिनों में अनुबंध हो सकता है। लेकिन अनुबंध के बाद इस प्लांट को बनने में करीब एक से डेढ़ साल का समय लगेगा।
ट्रंचिंग ग्राउंड के आसपास 70 झोपड़िया
शहरवासी ट्रंचिंग ग्राउंड के पास से गुजरने बचते हैं। लेकिन ट्रंचिंग ग्राउंड के आसपास 70 झुग्गी झोपड़िया। वहीं 35-40 दुकानें भी हैं। ये लोग दिन से लेकर रात तक इस गंदगी के ढेर और दुर्गंध के बीच रहते हैं।

पुराने कूड़े के निस्तारण का काम आठ अगस्त से शुरू हो जाएगा। लालपानी बीट एक में 22 करोड़ की लागत से बनने वाले प्लांट के लिए जल्द ही अनुबंध किया जाएगा। प्लांट के निर्माण के बाद कूड़े के निस्तारण की समस्या पूरी तरह से हल हो जाएगी।
-राहुल गोयल, नगर आयुक्त
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