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Rishikesh News: पहाड़ी उत्पादों को नहीं मिली पहचान, भवन भी गुमनाम
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नरेंद्रनगर वन प्रभाग मुनिकीरेती अंतर्गत भद्रकाली मंदिर और सुशीला हर्बल गार्डन के समीप बना उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के भवन में पहाड़ी उत्पादों को पहचान नहीं मिल पा रही है। देखरेख के अभाव में यह भवन जीर्णशीर्ण हो गया है। भवन में उत्पाद नहीं होने के कारण यह बंद होने की कगार पर आ गया है।
दो वर्ष पहले उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून की ओर से पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दिलाने के लिए सुशीला हर्बल गार्डन के समीप उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद का भवन खोला गया था। विभाग की ओर से यहां लाखों की लागत से इसका निर्माण किया गया था।
भवन के भीतर का डिजायन में बांस से तैयार किया गया था। इस भवन को पहाड़ी उत्पादों के लिए तैयार किया गया था। शुरूआत में इस भवन में पहाड़ी उत्पाद रिंगाल, बांस, प्राकृतिक रेशे, मौसमी घास से निर्मित उत्पाद और अन्य सामग्री सजाई गई थी। लेकिन भवन का प्रचार प्रसार न होने के कारण इसका संचालन सही तरीके से नहीं हो पाया। नतीजन यहां ग्राहकों की कमी रही। उत्पादों का सही ढंग से क्रय विक्रय नहीं होने के कारण विभाग ने भी इस ओर रुचि नहीं दिखाई। अब धीरे धीरे बंद होने के कगार पर आ गया। वर्तमान में इस भवन के ऐसे हाल हैं कि यह अधिकांश समय बंद ही रहता है।
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भवन में पहाड़ी उत्पादों को सही तरीके से पहचान नहीं मिल पा रही है। जहां पर यह भवन बना है वह प्रचार-प्रसार के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। विभाग की ओर से जल्द ही इस ओर सकारात्मक पहल की जा रही है। -विवेक भट्ट विक्रय सहायक
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दो वर्ष पहले उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून की ओर से पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान दिलाने के लिए सुशीला हर्बल गार्डन के समीप उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद का भवन खोला गया था। विभाग की ओर से यहां लाखों की लागत से इसका निर्माण किया गया था।
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भवन के भीतर का डिजायन में बांस से तैयार किया गया था। इस भवन को पहाड़ी उत्पादों के लिए तैयार किया गया था। शुरूआत में इस भवन में पहाड़ी उत्पाद रिंगाल, बांस, प्राकृतिक रेशे, मौसमी घास से निर्मित उत्पाद और अन्य सामग्री सजाई गई थी। लेकिन भवन का प्रचार प्रसार न होने के कारण इसका संचालन सही तरीके से नहीं हो पाया। नतीजन यहां ग्राहकों की कमी रही। उत्पादों का सही ढंग से क्रय विक्रय नहीं होने के कारण विभाग ने भी इस ओर रुचि नहीं दिखाई। अब धीरे धीरे बंद होने के कगार पर आ गया। वर्तमान में इस भवन के ऐसे हाल हैं कि यह अधिकांश समय बंद ही रहता है।
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भवन में पहाड़ी उत्पादों को सही तरीके से पहचान नहीं मिल पा रही है। जहां पर यह भवन बना है वह प्रचार-प्रसार के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। विभाग की ओर से जल्द ही इस ओर सकारात्मक पहल की जा रही है। -विवेक भट्ट विक्रय सहायक