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बूंदी गांव के स्यरंग बुग्याल में किया किर्जी पौधे का दमन
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Thu, 06 Sep 2018 11:18 PM IST
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किर्जी पौधे को नष्ट करने के लिए जाने से पहले रं समुदाय के महिला व पुरुष
- फोटो : अमर उजाला
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प्रत्येक बारह वर्षों में आयोजित होने वाला किर्जी विजयोत्सव रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया है। मेले का उद्घाटन एवरेस्टर व पद्मश्री मोहन सिंह गुंज्याल ने किया।
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पांच सितंबर की सुबह होते ही पारंपरिक परिधान मेें सजधज कर बूंदी गांव के महिला-पुरुषों ने गांव से अभिशप्त किर्जी पौधे के दमन के लिए कूच किया। महिलाएं विविध प्रकार के पारंपरिक रिल हाथों में लिए हुए थीं जबकि पुरुष तलवार व ढाल से लैस थे। गांव के देव डांगर लामाओं के मंत्रोचार व देव स्तुति के बाद सभी ने ढोल नगाड़ों के साथ स्यरंग बुग्याल की ओर कूच किया। हाथों में तलवार लिए रणबांकुरों के झुंड पारंपरिक जनजातीय युद्ध की याद दिला रहे थे। स्यरंग बुग्याल में पहुंच कर महिलाओं ने पारंपरिक रिल से किर्जी पौधे की दमन की शुरुआत की।
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इसके बाद देखते ही देखते युद्ध घोष के साथ पूरा स्यरंग बुग्याल युद्ध के मैदान में बदल गया। जहां तहां अभिशप्त किर्जी पौधे का दमन होने लगा। किर्जी दमन के बाद गांव के रणबांकुरों ने किर्जी पर विजय प्राप्त की। इसके बाद विजय जुलूस के रूप में ग्रामीण पारंपरिक छोलिया नृत्य करते हुए गांव को लौटे। इस बीच आसपास के गांवों से आये ग्रामीणों ने मंगल शगुन किया। गांव से बाहर ब्याही गयी बहनों ने विजयी रणबांकुरों का टीका लगाकर पारंपरिक ‘मन्ये च्यबमों‘ कर स्वागत किया। बूंदी पहुंच कर जय घोष व बूंदी माटी के जय‘ के नारे से पूरे गांव की वादियां गूंज उठी।
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बाद में सभी ने युद्ध में विजय के लिए एक-दूसरे को बधाईयां दी। समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी ने किर्जी विजयोत्सव की सभी को बधाई देते हुए कहा कि आज भी रं समुदाय के लोगों ने इस परंपरा को जीवित रखा है। सैकड़ों सालों बाद भी पारंपरिक उत्सव मूल रूप में विद्यमान है। विधायक ने गांव में सार्वजनिक शौचालय के लिए चार लाख रुपये व मेले संचालन के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की।
खेलकूदों का आयोजन भी हुआ
धारचूला। बूंदी गांव में दो सितंबर को भव्य आयोजन के साथ आरंभ हुए विविध खेल कूदों का उद्घाटन देहरादून के एडीएम बीर सिंह बुदियाल ने किया खेल प्रतियोगिता में वॉलीबाल के फाइनल में कुमाऊं स्काउट्स छियालेख ने बूंदी को पराजित कर ट्राफी में कब्जा किया। रस्साकसी में गर्ब्यांग ने आईटीबीपी को पराजित किया। तीन दिनों तक चले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में व्यास घाटी के गांवों के अलावा मित्र राष्ट्र नेपाल के गांवों ने भी कई आकर्षक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया।