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तीन गांव के लोग उपचार के लिए लगाते हैं 20 किमी की दौड़
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प्रतीकात्मक
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। विकासखंड के काणाधार, डूंडू, मलान के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आज भी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। सड़क नहीं होने के चलते गांव से लोगों ने अन्य जिलों का रुख कर लिया। सड़क नहीं होने के कारण लोगों को पहले 10 किमी की यात्रा करते हुए छड़नदेव तक पहुंचना पड़ता है। उसके बाद 10 किमी की वाहन से यात्रा कर पीएचसी कनालीछीना तक पहुंचते हैं। अगर उपचार नहीं मिला तो ग्रामीणों को 30 किमी दूर पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय आना पड़ता है। ग्रामीण दशकों से सड़क की मांग करते आ रहे हैं। गांव में कोई रात में बीमार हो गया तो डोली ही एंबुलेंस की तरह काम करती है। ग्रामीण कंधों में बीमार को 10 किमी पैदल लेकर छड़नदेव सड़क तक पहुंचते हैं, जहां से फिर बीमार को 108, निजी या टैक्सी वाहन से अस्पताल पहुंचाया जाता है। सड़क नहीं होने से सुविधाओं की चाह में लोगों ने हल्द्वानी, पिथौरागढ़, देहरादून समेत अन्य जिलो का रुख कर लिया। पहले गांव की आबादी एक हजार थी जो अब 600 रह गई है।
दशकों से तीन गांव के लोगों की समस्या को जनप्रतिनिधियों ने नहीं समझा। सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मगर उन माताओं की पीड़ा को भी किसी ने नहीं देखा। - दीपा, स्थानीय
तीन गांव के लोग पलायन के लिए मजबूर हैं। सड़क नहीं होने के चलते सुविधाओं का अभाव है। 20किमी की यात्रा कर कनालीछीना खंड पहुंचना पड़ता है। जबकि 10किमी पैदल चलना पड़ता है। - बल्लभ चंद्र, स्थानीय
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पिछले साल सड़क के लिए चुनाव बहिष्कार किया था। मगर शासन-प्रशासन ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया। अब चुनाव आए हैं तो जनप्रतिनिधि भी द्वार पर आएंगे। उनसे सवाल किया जाएगा। -पीतांबर जोशी, स्थानीय
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दशकों से तीन गांव के लोगों की समस्या को जनप्रतिनिधियों ने नहीं समझा। सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मगर उन माताओं की पीड़ा को भी किसी ने नहीं देखा। - दीपा, स्थानीय
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तीन गांव के लोग पलायन के लिए मजबूर हैं। सड़क नहीं होने के चलते सुविधाओं का अभाव है। 20किमी की यात्रा कर कनालीछीना खंड पहुंचना पड़ता है। जबकि 10किमी पैदल चलना पड़ता है। - बल्लभ चंद्र, स्थानीय
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पिछले साल सड़क के लिए चुनाव बहिष्कार किया था। मगर शासन-प्रशासन ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया। अब चुनाव आए हैं तो जनप्रतिनिधि भी द्वार पर आएंगे। उनसे सवाल किया जाएगा। -पीतांबर जोशी, स्थानीय