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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Pathak's espousal early planting

पाठक ने की परिणय पौधरोपण की शुरुआत

Sun, 12 Jul 2015 10:32 PM IST
डा. दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़
डा. दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 12 Jul 2015 10:32 PM IST
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एक तरफ दुल्हन की विदाई का गीत बज रहा होता है, दूसरी तरफ एक व्यक्ति गमले में रखा पौधा लेकर पहुंचता है। थोड़ी देर के लिए विदाई का यह माहौल भावुकता के बजाए चेतना में बदल जाता है। यह व्यक्ति परिणय पौधरोपण के लिए दूल्हा, दुल्हन और उनके परिजनों को बुला लेता है। फिर पौधा दुल्हन के माता-पिता को इस उम्मीद के साथ सौंपता है कि अब बेटी की तरह ही इस पौधे का पालन-पोषण करेंगे।

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जून 2012 में लोहाघाट के बजरंगवली वार्ड से प्रकृति संरक्षण की इस अनूठी पहल की शुरुआत करने वाले जीआईसी गोरंगचौड़ में वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता मोहन चंद्र पाठक अब तक 19 परिणय पौधों का रोपण करा चुके हैं। यही नहीं वह इन परिणय पौधों का समय-समय पर निरीक्षण भी करते हैं।
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मोहन चंद्र पाठक कहते हैं कि इस राज्य में प्रकृति के संरक्षण के लिए चिपको और मैती जैसे प्रभावी आंदोलन चले हैं। इसे किसी भी रूप में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने परिणय पौधरोपण का विचार रखा। रक्षाबंधन के दिन पौधों को रक्षा-तागा बांधना, एक विद्यार्थी-एक पौधा कार्यक्रम, विवाह की 50वीं वर्षगांठ पर गोल्डन जुबली पौधरोपण, जन्मदिन पर पौधरोपण, क्रिममस-ट्री पर पौधे का रोपण आदि आदि।
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वह कहते हैं कि अच्छा विचार लोग जल्दी अपना लेते हैं। 11 वर्ष से प्रवक्ता के पद पर कार्यरत पाठक कहते हैं कि उन्होंने वनस्पति विज्ञान से एमएससी किया है। फिर विद्यालय में यही विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी मिली। जब तक शिक्षक अपने विषय को व्यवहार रूप में नहीं लाएगा, तब तक उसकी शिक्षा का कोई अर्थ भी नहीं बनता।


पाठक कहते हैं कि परिणय पौधरोपण के लिए जितने स्थानों पर भी वह पहुंच पाए लोगों ने उसका स्वागत किया। कुछ परिवारों ने तो बेटा और बेटी की शादी के कार्ड में मुख्य कार्यक्रम के साथ परिणय पौधरोपण का कार्यक्रम भी अंकित करना शुरू किया है। वह कहते हैं कि परिणय पौध के बहाने इस धरती पर एक नए पौध को पलने, बढ़ने का मौका मिल जाता है। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को अपने विषय के अनुरूप व्यावहारिक प्रयोग सामने लाने चाहिए।

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