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गोचर थल के अस्पताल में नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
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गोचर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
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थल (पिथौरागढ़)। स्थानीय महिला अस्पताल/अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) गोचर में अल्ट्रासाउंड, ब्लड, स्टूल टेस्ट, एक्स-रे सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। थल क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांवों की कई गरीब परिवार की माताएं इलाज के लिए इससे आगे कहीं नहीं जा पाती हैं। इस कारण यहां इलाज न मिलने पर वह असहाय हो जाती हैं।
महिलाओं के उत्थान के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2003 में थल के गोचर में महिला चिकित्सालय खोला था। उत्तरांचल सरकार के तत्कालीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने उसी साल 10 सितंबर को इसका लोकार्पण किया था। चार बेड के इस महिला अस्पताल में सिर्फ एक साल महिला डॉक्टर तैनात रहीं और वर्ष 2004 में उनका तबादला होने के बाद उनकी प्रतिस्थानी कोई दूसरी महिला डॉक्टर नहीं आईं। इस अस्पताल में 19 साल से डॉक्टर नहीं हैं। महिला डॉक्टर न होने से यहां मरीजों की कोई जांच तक नहीं हो पा रही है। 14 साल से फार्मासिस्ट तक न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने छह साल पहले इसे एपीएचसी गोचर से संबद्ध कर दिया। तीन स्टाफ नर्स और एक एएनएम के भरोसे चल रहे इस अस्पताल में प्रसव होता है। बुधवार को बच्चों का टीकाकरण भी कराया जाता है। प्रसव में जटिलता और अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
बोली महिला जनप्रतिनिधि
चिकित्सा के नाम पर पहाड़ के गरीब महिलाओं को छला जा रहा है। गांव की कामकाजी महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होती हैं। इसलिए सरकार को यहां महिला डॉक्टर की तैनाती करनी चाहिए। - रेखा जोशी, ग्राम प्रधान, दौली।
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अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जांच, हड्डी टूटने पर प्लास्टर के लिए 52 किमी दूर पिथौरागढ़ या 225 किमी हल्द्वानी जाना पड़ रहा है। करीब 700 गांवों से घिरे इस क्षेत्र में कम से कम 20 बेड वाले अस्पताल की जरूरत है। -हेमा देवी, ग्राम प्रधान, धिगतड़।
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महिलाओं के उत्थान के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2003 में थल के गोचर में महिला चिकित्सालय खोला था। उत्तरांचल सरकार के तत्कालीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने उसी साल 10 सितंबर को इसका लोकार्पण किया था। चार बेड के इस महिला अस्पताल में सिर्फ एक साल महिला डॉक्टर तैनात रहीं और वर्ष 2004 में उनका तबादला होने के बाद उनकी प्रतिस्थानी कोई दूसरी महिला डॉक्टर नहीं आईं। इस अस्पताल में 19 साल से डॉक्टर नहीं हैं। महिला डॉक्टर न होने से यहां मरीजों की कोई जांच तक नहीं हो पा रही है। 14 साल से फार्मासिस्ट तक न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने छह साल पहले इसे एपीएचसी गोचर से संबद्ध कर दिया। तीन स्टाफ नर्स और एक एएनएम के भरोसे चल रहे इस अस्पताल में प्रसव होता है। बुधवार को बच्चों का टीकाकरण भी कराया जाता है। प्रसव में जटिलता और अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
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बोली महिला जनप्रतिनिधि
चिकित्सा के नाम पर पहाड़ के गरीब महिलाओं को छला जा रहा है। गांव की कामकाजी महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होती हैं। इसलिए सरकार को यहां महिला डॉक्टर की तैनाती करनी चाहिए। - रेखा जोशी, ग्राम प्रधान, दौली।
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अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जांच, हड्डी टूटने पर प्लास्टर के लिए 52 किमी दूर पिथौरागढ़ या 225 किमी हल्द्वानी जाना पड़ रहा है। करीब 700 गांवों से घिरे इस क्षेत्र में कम से कम 20 बेड वाले अस्पताल की जरूरत है। -हेमा देवी, ग्राम प्रधान, धिगतड़।