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पौष्टिक आहार पर लाखों खर्च: फिर भी 45 फीसदी गर्भवतियां एनिमियाग्रस्त, 2884 की जांच; 1292 में मिली खून की कमी

Wed, 12 Feb 2025 01:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो दीपक चंद्र कापड़ी, संवाद
दीपक चंद्र कापड़ी, संवाद Updated Wed, 12 Feb 2025 01:12 PM IST
सार

गर्भवतियों को पौष्टिक आहार दिलाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, इसके बाद भी पिथौरागढ़ जिले की 45 फीसदी गर्भवतियां एनिमियाग्रस्त मिलीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जब जांच की तो बाल विकास विभाग की योजना की हकीकत सामने आई। 

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45 percent pregnant women suffer from anemia in pithoragarh
गर्भवती महिला

विस्तार

पिथौरागढ़ में गर्भवतियों को पौष्टिक आहार दिलाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, इसके बाद भी 45 फीसदी गर्भवतियां एनिमियाग्रस्त मिलीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जब जांच की तो बाल विकास विभाग की योजना की हकीकत सामने आई। पौष्टिक आहार देने के बाद भी 2884 गर्भवतियों की जांच में 1292 में खून की कमी मिली है। बाल विकास विभाग के मुताबिक जिले में तीन बच्चे अति कुपोषित और नौ कुपोषित मिले हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग इलाज करवा रहा है।

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गर्भवतियों को सेहतमंद बनाकर मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के साथ ही कुपोषण के उन्मूलन के लिए बाल विकास विभाग ने पौष्टिक आहार योजना संचालित की है। केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें इसकी निगरानी कर रही हैं। एक गर्भवती को सप्ताह में दो दिन अंडा या पौष्टिकता से भरपूर खजूर के साथ फोर्टिफाइड चावल दिया जाता है। फिर भी गर्भवतियों की सेहत में सुधार नहीं हो रहा है।
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विभाग ने दो फरवरी से हर गर्भवती की सेहत को परखने के लिए एनिमिया की जांच शुरू की। पिथौरागढ़ जिले में 10 फरवरी तक नौ दिन में पंजीकृत 3725 के सापेक्ष 2884 गर्भवतियों की जांच हुई तो 45 फीसदी यानि 1292 गर्भवतियां एनिमियाग्रस्त मिलीं। अभी 841 की जांच होनी है। बाल विकास विभाग की गर्भवतियों को सेहतमंद रखने की योजना केंद्र, राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक कितनी सफल है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 
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मां में खून की कमी से बच्चे हो रहे हैं कुपोषित
मां में खून की कमी का दुष्प्रभाव सीधे तौर पर बच्चे पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि गर्भावस्था में मां सेहतमंद नहीं रही तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी प्रभावित होता है।

स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के आंकड़ों में अंतर
किस संजीदगी से गर्भवतियों की सेहत पर नजर रखी जा रही है, इसका अंदाजा स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग के आंकड़ों से साफ है। बाल विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हर ग्राम सभा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर वहां की हर गर्भवती का पंजीकरण कराने की जिम्मेदारी है ताकि पौष्टिक आहार देकर उसे सेहतमंद बनाने के साथ ही योजना को सफल बनाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज में वर्तमान में 3884 गर्भवतियां पंजीकृत हैं, जबकि बाल विकास विभाग सिर्फ 1250 महिलाओं के गर्भवती होने का दावा कर रहा है। ऐसे में जमीनी स्तर पर गर्भवतियों का सही आंकड़ा सामने नहीं आ रहा है और ऐसे हालात में योजना का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।


जिन 1292 गर्भवतियों में खून की कमी मिली है विभाग उन्हें आयरन की गोलियां देने के साथ ही अन्य उपाय कर रहा है। -डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।

पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवतियां अपनी सेहत के प्रति जागरूक नहीं दिखतीं। परिजन भी इसमें पीछे रहते हैं। यही कारण है कि उनमें खून की कमी हो जाती है। विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। - डॉ. निर्मल बसेड़ा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग, पिथौरागढ़।

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