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गर्खा में नहीं पहुंचा कोई भी प्रशासनिक अधिकारी
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
Updated Sat, 16 Jul 2016 10:31 PM IST
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जेठीगांव में आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त पुलिया
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में 30 जून को आई आपदा की मार अस्कोट वाले आज भी झेलने को मजबूर है। क्षेत्र के गर्खा ग्राम पंचायत के ओगला, जेठी, मेलमोड़ा, पसमा, पातली गांव, सूनकोट, पंत गांव, उत्तरछाना, नरेत, प्यांखेत, सिनयाड़ी, हुड़की, सिरोली, ग्वानी, देवरखेत गांवों में आपदा के कारण क्षेत्रवासियों के मकान, उपजाऊ भूमि खतरे की जद में आ गई है। गांवों को जोड़ने वाले पुल के ध्वस्त होने से दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
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इन गांव में रहने वाले 150 परिवारों के मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। खेत भी मलबे से पट गए हैं। वहीं क्षेत्र में आपदा की मार से प्रभावित पुष्कर सिंह बिष्ट, आनंद सिंह बिष्ट, जोगा सिंह, राम सिंह, मनोज सिंह जेठी के परिवारों ने पिथौरागढ़ में अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रखी है। इन लोगों का कहना है कि प्रशासन से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। क्षेत्रवासियों ने बताया कि अब तक गर्खा क्षेत्र में मात्र पटवारी ही आकलन करने पहुंच पाए है। मदद कब मिलेगी, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। गांव के कई लोग ऐसे हैं, जो खेती पर ही निर्भर थे, मगर अब खेतों में मलबा पटने से ये लोग बेहद परेशान हैं।
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गर्खा ग्राम पंचायत हुड़की, चिरोली-ग्वानी-देवरखेत पेयजल योजना आपदा से ध्वस्त होने से गांव के लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा हैं। लोग गधेरों और बारिश के पानी पर निर्भर हैं। जेठी गांव निवासी राम सिंह, पुष्कर, देवेंद्र, जगत, किशन सिंह, देवकी देवी और द्रोपदी देवी के मकानों में दरार पड़ने से रहने में भय बना है। इन सभी लोगों के उपजाऊ खेत तहस-नहस हो चुके हैं। गांव के पांच परिवारों के घर में 30 जून से बिजली नहीं है। गांव के लोग किसी प्रशासनिक अधिकारी के गांव आने की आस लगाए बैठे हैं।
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