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40 लाख का भुगतान लेकर एनजीओ फरार
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:47 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट के बुनकरों को नई तकनीक सिखाने और तैयार सामान को बाजार उपलब्ध कराने के लिए दो साल पूर्व दिल्ली की जिस संस्था ने यहां काम शुरू किया था वह करीब 40 लाख रुपये का भुगतान लेकर फरार हो गई है। उद्योग विभाग ने संस्था को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि यदि 10 अक्तूबर से यहां काम शुरू नहीं किया तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। यही नहीं संस्था ने नगरपालिका के जिस वृहद कक्ष में अपना प्रशिक्षण केंद्र खोला था उसका एक वर्ष के किराए का भुगतान भी नहीं किया है। किराए की राशि कम से कम 50 हजार रुपये है।
वर्ष 2015 में दिल्ली की महिला आर्टिस्ट वेलफेयर सोसायटी नाम की स्वयंसेवी संस्था ने केंद्र सरकार से बुनकर प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास कराया था। प्रशिक्षण देने के लिए रामलीला मैदान में नगरपालिका के हॉल और पुराने बुनकर प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाने लगा। शुरुआत में संस्था ने अनुसूचित जाति और जनजाति महिलाओं का पंजीकरण कर अपने मास्टर ट्रेनरों की सहायता से ऊनी शॉल, कंबल, मफलर, टोपी आदि को तैयार करना शुरू किया। जो सामग्री तैयार की जा रही थी उसे बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा था। लेकिन जनवरी 2017 से इस संस्था ने यहां काम बंद कर दिया। अभी भी इनके केंद्रों में आधी अधूरी सामग्री रखी हुई है। आधे में प्रशिक्षण बंद हो जाने से महिला बुनकर भारी परेशानी में हैं। वह इसी प्रतीक्षा में हैं कि किसी तरह प्रशिक्षण फिर से शुरू हो जाए।
उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक डीएस खोलिया ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की टीम ने इन केंद्रों का निरीक्षण कर लिया है। संस्था को 10 अक्तूबर तक का समय दिया गया है। अगर 10 अक्तूबर तक संस्था काम फिर से शुरू नहीं करती है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। बताया गया है कि संस्था ने दो सालों में केंद्र सरकार से 40 लाख रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया था। नगरपालिका के अधिकारी इस बात से परेशान हैं कि किराए की राशि कैसे वसूली जाए। नगरपालिका अध्यक्ष कवींद्र शाही ने बताया कि संस्था के खिलाफ अब कानूनी कदम उठाया जाएगा।
वर्ष 2015 में दिल्ली की महिला आर्टिस्ट वेलफेयर सोसायटी नाम की स्वयंसेवी संस्था ने केंद्र सरकार से बुनकर प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट पास कराया था। प्रशिक्षण देने के लिए रामलीला मैदान में नगरपालिका के हॉल और पुराने बुनकर प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाने लगा। शुरुआत में संस्था ने अनुसूचित जाति और जनजाति महिलाओं का पंजीकरण कर अपने मास्टर ट्रेनरों की सहायता से ऊनी शॉल, कंबल, मफलर, टोपी आदि को तैयार करना शुरू किया। जो सामग्री तैयार की जा रही थी उसे बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा था। लेकिन जनवरी 2017 से इस संस्था ने यहां काम बंद कर दिया। अभी भी इनके केंद्रों में आधी अधूरी सामग्री रखी हुई है। आधे में प्रशिक्षण बंद हो जाने से महिला बुनकर भारी परेशानी में हैं। वह इसी प्रतीक्षा में हैं कि किसी तरह प्रशिक्षण फिर से शुरू हो जाए।
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उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक डीएस खोलिया ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की टीम ने इन केंद्रों का निरीक्षण कर लिया है। संस्था को 10 अक्तूबर तक का समय दिया गया है। अगर 10 अक्तूबर तक संस्था काम फिर से शुरू नहीं करती है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। बताया गया है कि संस्था ने दो सालों में केंद्र सरकार से 40 लाख रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया था। नगरपालिका के अधिकारी इस बात से परेशान हैं कि किराए की राशि कैसे वसूली जाए। नगरपालिका अध्यक्ष कवींद्र शाही ने बताया कि संस्था के खिलाफ अब कानूनी कदम उठाया जाएगा।
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