एक साथ बैठते हैं पांच कक्षाओं के बच्चे
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पतेत के जूनियर हाईस्कूल को आदर्श विद्यालय का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन व्यवस्थाओं में कतई सुधार नहीं हुआ है। इस आदर्श विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। कुल 50 छात्रसंख्या वाले इस विद्यालय में आठ कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मात्र तीन शिक्षक तैनात हैं। एक शिक्षक को अक्सर सरकारी काम के लिए विद्यालय से बाहर रहना पड़ता है। स्टाफ की कमी के कारण इस आदर्श विद्यालय में प्राथमिक स्तर में कक्षा एक से पांच तक के 19 बच्चों को एक साथ बैठाना पड़ता है। ऐसे में बच्चे क्या पढ़ते होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जिले के सबसे पुराने विद्यालय को पहले भी आदर्श विद्यालय का दर्जा मिला था। इस बार जब प्रदेश सरकार ने नए आदर्श विद्यालयों की घोषणा की तो पतेत विद्यालय का नाम उसमें फिर से जोड़ दिया गया। आदर्श विद्यालय बनाते समय यह कहा गया था कि विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी। स्टाफ की कोई कमी नहीं रहेगी। आदर्श विद्यालय की घोषणा अप्रैल में हो गई थी, लेकिन चार माह बाद भी विद्यालय में न तो पढ़ाई का माहौल बन पाया है और न ही स्टाफ भरा गया है। सिर्फ विद्यालय भवन का रंगरोगन जरूर कर दिया गया है। अभिभावक शिक्षक संघ की अध्यक्ष ममता देवी ने कहा कि ऐसे आदर्श विद्यालय की जरूरत क्या है, जिसमें पढ़ाने के लिए शिक्षक न हों।
विद्यालय में पेयजल का गंभीर संकट
पतेत आदर्श विद्यालय में पेयजल का गंभीर संकट है। 30 जून को पानी की लाइन भारी बारिश के दौरान टूट गई थी, तब से पेयजल सप्लाई ठप है। पानी न होने से मुख्य समस्या मध्यान्ह भोजन बनाने में आ रही है। बच्चों को मध्यान्ह भोजन के लिए पानी खुद जुटाना पड़ता है।
जल्द हो जाएगी शिक्षकों की व्यवस्था
मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि आदर्श विद्यालयों में मानक के अनुसार शिक्षकों के सभी पद भरे जाएंगे। यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक माह में सभी आदर्श विद्यालयों में स्टाफ भर दिया जाएगा।