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अंग्रेजों का बनाया विश्राम गृह खंडहर में तब्दील
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:32 PM IST
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अस्कोट में जर्जर हालत में पहुंचा वन विभाग का डाकबंगला
- फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 1862 में अंग्रेजों द्वारा अस्कोट क्षेत्र में बनाया गया विश्राम गृह सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। वर्ष 2015 में आई आंधी विश्राम गृह की छत उड़ा ले गई, तब से विश्राम गृह खंडहर में तब्दील हो गया है। 1909 में वन विभाग के अधीन हुए विश्राम गृह की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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अंग्रेजों ने विश्राम गृह का निर्माण अपने अधिकारियों और सैनिकों के रात्रि विश्राम के लिए किया था। विश्राम गृह में बने चार कमरों में अंग्रेजी सैनिकों और घोड़ों की रुकने की व्यवस्था थी। धीरे-धीरे इसी विश्राम गृह से अंग्रेजी अधिकारी अपनी हुकूमत की रूपरेखा तय किया करते थे। अंग्रेज अधिकारी लोगों के वादों का निपटारा इसी विश्राम गृह में कोर्ट लगाकर किया करते थे। 1909 में इस विश्राम गृह को वन विभाग के अधीन किया गया। वन विभाग ने वर्ष 2010-11 में विश्राम गृह का जीर्णोद्धार किया था, लेकिन विभाग द्वारा कराया गया कार्य 2015 की आंधी के सामने नहीं टिक सका और बिना छत के विश्राम गृह खंडहर में तब्दील हो चुका है। विश्राम गृह की दीवारें जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। विश्राम गृह की यह हालत क्षेत्र के लोगों को भी मायूस कर रही है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा विश्राम गृह की हालत ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। पूर्व में भी विश्राम गृह के जीर्णोद्धार के नाम पर सिर्फ लीपापोती की गई है।
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वहीं, वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि विश्राम गृह के मरम्मत के लिए सरकार से धनराशि की मांग की गई है। बजट आने पर मरम्मत की जाएगी। उन्होंने बताया कि 1962 में कफलपानी में भी एक विश्राम गृह बनाया गया था, जिसकी हालत भी दयनीय बनी हुई है।
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उधर, क्षेत्र के बुजुर्ग लक्ष्मण सिंह पाल (94) बताते हैं कि पहले विश्राम गृह में काफी रौनक रहती थी। विश्राम गृह में अंग्रेज अधिकारियों द्वारा कचहरी लगाई जाती थी। विश्राम गृह में अंग्रेज अधिकारी, सेना और घोड़ों के रुकने के लिए भी उचित व्यवस्था थी। पहले मतदान के लिए पोलिंग बूथ इसी विश्राम गृह में बनाया गया था। पाल कहते हैं कि जल्द ही विश्राम गृह के पुनर्निर्माण के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी तो भविष्य की पीढ़ी इस विश्राम गृह के इतिहास को नहीं जान पाएगी।