{"_id":"117-69589","slug":"Pithoragarh-69589-117","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगल को दस साल के लिए कोटगाड़ी को चढ़ाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल को दस साल के लिए कोटगाड़ी को चढ़ाया
Pithoragarh
Updated Sun, 29 Dec 2013 05:49 AM IST
विज्ञापन
गंगोलीहाट। जंगल को बचाने के लिए उप्राड़ा के लोगों ने भी देवी का सहारा लिया है। लोगों ने उप्राड़ा का जंगल दस साल के लिए न्याय की देवी कोटगाड़ी को चढ़ा दिया है। जंगल को देवी के चढ़ाने के लिए शपथपत्र भी मंदिर में चढ़ाया गया।
जंगल में लगातार हो रहे अवैध कटान से आजिज उप्राड़ा के लोगों ने वन पंचायत सरपंच संजय पंत अध्यक्षता में हुई बैठक में जंगल बचाने पर विचार विमर्श किया। लोगों ने एक राय से तय किया कि न्याय की देवी के शरण में जाने से ही जंगल बच सकता है। तय किया कि जंगल को न्याय की देवी कोटगाड़ी को दस साल के लिए चढ़ा दिया जाए। इस अवधि में जंगल से केवल घास और सूखी लकड़ियों का ही ग्रामीण दोहन करेंगे। जंगल को किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
शुक्रवार को वन पंचायत सरपंच के साथ ही नित्यानंद पंत, गंगा सिंह, मोहन चंद्र पंत, गोपाल सिंह, धर्मानंद पंत, गंगा प्रसाद पंत, श्याम सिंह, हरि राम, मनोज पंत, कुंदन सिंह, राम सिंह, गणेश सिंह, भगवती पंत, जीवंती पंत, रमेश राम आदि ने पांखू स्थित कोटगाड़ी मंदिर जाकर जंगल दस साल के लिए देवी को चढ़ाने का शपथपत्र मंदिर में चढ़ा दिया। इन लोगों को विश्वास है कि न्याय की देवी को जंगल चढ़ाने से जंगल की रक्षा हो पाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जंगल में लगातार हो रहे अवैध कटान से आजिज उप्राड़ा के लोगों ने वन पंचायत सरपंच संजय पंत अध्यक्षता में हुई बैठक में जंगल बचाने पर विचार विमर्श किया। लोगों ने एक राय से तय किया कि न्याय की देवी के शरण में जाने से ही जंगल बच सकता है। तय किया कि जंगल को न्याय की देवी कोटगाड़ी को दस साल के लिए चढ़ा दिया जाए। इस अवधि में जंगल से केवल घास और सूखी लकड़ियों का ही ग्रामीण दोहन करेंगे। जंगल को किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
विज्ञापन
शुक्रवार को वन पंचायत सरपंच के साथ ही नित्यानंद पंत, गंगा सिंह, मोहन चंद्र पंत, गोपाल सिंह, धर्मानंद पंत, गंगा प्रसाद पंत, श्याम सिंह, हरि राम, मनोज पंत, कुंदन सिंह, राम सिंह, गणेश सिंह, भगवती पंत, जीवंती पंत, रमेश राम आदि ने पांखू स्थित कोटगाड़ी मंदिर जाकर जंगल दस साल के लिए देवी को चढ़ाने का शपथपत्र मंदिर में चढ़ा दिया। इन लोगों को विश्वास है कि न्याय की देवी को जंगल चढ़ाने से जंगल की रक्षा हो पाएगी।
विज्ञापन