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सड़कें बंद होने से गहराने लगा जरूरी सामान का संकट
Updated Thu, 19 Jul 2018 11:13 PM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। बांसबगड़-कोटा सड़क बंद होने से कोटा क्षेत्र के लोग बेहद परेशानी में हैं। दिगतड़ रौली के पास सुरक्षा दीवार न लगने चार मकान खतरे की जद में आ गए हैं। वहीं, कोटा के 20 विद्यार्थियों को तीन किमी दूर दिगतड़ में किराए पर कमरा लेकर रहना पड़ रहा है। कोटा क्षेत्र में राशन और जरूरी सामान की भी किल्लत होने लगी है।
17 किमी लंबी कोटा सड़क दो जुलाई की बारिश में कई स्थानों पर मलबा गिरने से बंद हो गई थी। सड़क पर दिगतड़ तक 14 किमी में ही वाहन चल रहे हैं। वहां से तीन किमी आगे कोटा तक सड़क बोल्डर, मलबे से पटी है। मलबा गिरने से गांवों को जाने वाले रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस कारण पंद्रपाला जीआईसी और प्राथमिक पाठशाला दिगतड़ (कोटा) में पढ़ने वाले 20 बच्चे दिगतड़ में कमरा लेकर रह रहे हैं।
पीएमजीएसवाई के अवर अभियंता विवेक धर्मशक्तू का कहना है कि ग्रामीण सुरक्षा दीवार लगाने तक मलबा नहीं हटाने दे रहे हैं। सुरक्षा दीवार न लगने से चार मकानों के लिए भी खतरा है। विभाग के पास सुरक्षा दीवार लगाने के लिए धन नहीं है। 26 लाख रुपये का प्रस्ताव वर्ष 2017 में शासन को गया है, लेकिन धन नहीं मिला है। विभाग के पास अन्य कोई मद नहीं है। इसकी जानकारी डीएम को दे दी है। प्रभारी डीएम वंदना के निर्देश पर दिगतड़ में सड़क बंद होने का बोर्ड लगाया जा रहा है।
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105 परिवार पानी के संकट से जूझ रहे
नाचनी। दो जुलाई की अतिवृष्टि में कोटा और मलौन गांव को जलापूर्ति करने वाली पेयजल योजना भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। कोटा के 55 और मलौन के 60 परिवार गंभीर जल संकट झेल रहे हैं। लोगों को दूर-दूर से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। जल संस्थान ने बुधवार को 300 मीटर प्लास्टिक के पाइप कोटा भेजे हैं। उससे अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। जल संस्थान के जेई गजेंद्र मनौला ने बताया कि मुनस्यारी के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में होने के कारण वह कोटा नहीं आ पा रहे हैं। अस्थायी व्यवस्था के तहत पानी चलाया जा रहा है, जल्द ही योजना की मरम्मत कर ली जाएगी।
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17 किमी लंबी कोटा सड़क दो जुलाई की बारिश में कई स्थानों पर मलबा गिरने से बंद हो गई थी। सड़क पर दिगतड़ तक 14 किमी में ही वाहन चल रहे हैं। वहां से तीन किमी आगे कोटा तक सड़क बोल्डर, मलबे से पटी है। मलबा गिरने से गांवों को जाने वाले रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस कारण पंद्रपाला जीआईसी और प्राथमिक पाठशाला दिगतड़ (कोटा) में पढ़ने वाले 20 बच्चे दिगतड़ में कमरा लेकर रह रहे हैं।
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पीएमजीएसवाई के अवर अभियंता विवेक धर्मशक्तू का कहना है कि ग्रामीण सुरक्षा दीवार लगाने तक मलबा नहीं हटाने दे रहे हैं। सुरक्षा दीवार न लगने से चार मकानों के लिए भी खतरा है। विभाग के पास सुरक्षा दीवार लगाने के लिए धन नहीं है। 26 लाख रुपये का प्रस्ताव वर्ष 2017 में शासन को गया है, लेकिन धन नहीं मिला है। विभाग के पास अन्य कोई मद नहीं है। इसकी जानकारी डीएम को दे दी है। प्रभारी डीएम वंदना के निर्देश पर दिगतड़ में सड़क बंद होने का बोर्ड लगाया जा रहा है।
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105 परिवार पानी के संकट से जूझ रहे
नाचनी। दो जुलाई की अतिवृष्टि में कोटा और मलौन गांव को जलापूर्ति करने वाली पेयजल योजना भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। कोटा के 55 और मलौन के 60 परिवार गंभीर जल संकट झेल रहे हैं। लोगों को दूर-दूर से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। जल संस्थान ने बुधवार को 300 मीटर प्लास्टिक के पाइप कोटा भेजे हैं। उससे अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। जल संस्थान के जेई गजेंद्र मनौला ने बताया कि मुनस्यारी के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में होने के कारण वह कोटा नहीं आ पा रहे हैं। अस्थायी व्यवस्था के तहत पानी चलाया जा रहा है, जल्द ही योजना की मरम्मत कर ली जाएगी।