फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   16 houses of Bhadkholi were found to be debris

भंडाखोली के 16 मकानों में मलबा पटा

Sun, 28 May 2017 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Sun, 28 May 2017 11:03 PM IST
विज्ञापन
16 houses of Bhadkholi were found to be debris
मूनाकोट में मलबे से पटा एक मकान - फोटो : अमर उजाला

शनिवार को मूनाकोट विकासखंड के भंडाखोली गांव में बादल फटने के बाद ऊपर भंडाखोली में 12 लोगों और निचली भंडाखोली में चार लोगों के मकान पूरी तरह मलबे से पट गए है और इसी मलबे के बहकर नीचे आने से गौरीहाट कस्बे की चार दुकानों और चार गोशालाओं में मलबा भर गया। गांव के प्रकाश सिंह सौन, नैन सिंह, नरेंद्र सिंह और त्रिलोक सिंह के मकानों को भारी नुुकसान पहुंचा है।

विज्ञापन


नेपाल सीमा को जोड़ने वाला झूलाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग बड़ालू से आगे करीब 50 जगह पर बंद हो गया था। रात भर लोक निर्माण विभाग ने दो जेसीबी लगाकर सुबह चार बजे सड़क को खोला, तब जाकर फंसे हुए लोग और बाराती आगे बढ़ पाए। बारिश के साथ आए मलबे से बिसखोली और बगरतोली के 100 परिवारों के लिए बनाई गई पेयजल लाइन भी ध्वस्त हो गई। साथ ही रज्यूड़ा से जमीरपानी और खरक्यूड़ा के लिए बनाई गई पेयजल योजना भी ध्वस्त हो गई।
विज्ञापन


झूलाघाट के लिए बनी च्योड़ीगाड़ पेयजल योजना भी कई स्थानों पर टूट गई है। भारी मात्रा में मलबा आने से झूलाघाट-बलतड़ी सड़क भी कई स्थानों पर मलबे से पट गई। इस सड़क पर बना सीमेंट का पुल भी बह गया। इस कारण तीन गांवों और एसएसबी की सप्तड़ी चेक पोस्ट के लिए खाद्यान्न की सप्लाई भी बंद हो गई है। सीमू-बलतड़ी सड़क पर बना धान का पौधालय बह गया है। सात दोपहिया और चौपहिया वाहन भी पुल टूटने से बलतड़ी में फंसे हैं। सड़क टूटने से आगे के गांवों को पैदल चलने का भी जोखिम होने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूरे क्षेत्र में खेतों में मलबा आने से किसानों की फसल और फलदार पेड़ भी नष्ट हो गए हैं। 73 वर्षीय गौरीहाट निवासी त्रिलोक सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में इतनी बड़ी आपदा नही देखी। सीमू के ललित चंद, बेश चंद, तेज सिंह, प्रताप चंद और गणेश सिंह के मकानों में मलबा आने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सीमू के पास भारी मात्रा में मलबा काली नदी में जाने से नदी का बहाव कानड़ी के पास थम गया है। क्षेत्र में आई इतनी बड़ी आपदा के बावजूद रविवार को दूसरे दिन भी जिला प्रशासन का कोई भी बड़ा अधिकारी इन गांवों में नहीं पहुंचा।


दोपहर बाद उपजिलाधिकारी एसके पांडे ने गौरीहाट और झूलाघाट का भ्रमण किया और लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को सड़क को बारीकी से साफ करने के लिए कटर लगाने के आदेश दिए। साथ ही क्षेत्र की सभी टूटी पानी की योजनाओं को शीघ्र बनाने के लिए जल संस्थान के अधिकारियों को निर्देशित किया। पूरे क्षेत्र में शाम तक विद्युत व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई थी। गौरीहाट के सामाजिक कार्यकर्ता ललित सोराड़ी ने बताया कि कुछ समय पहले तक यहां के लोगों ने सूखे की मार झेली थी अब आपदा की झेलनी पड़ रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed