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हिमाचल के भेड़ पालक उच्च हिमालयी क्षेत्र को रवाना
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पिथौरागढ़। हिमाचल प्रदेश के भेड़ पालक उच्च हिमालयी क्षेत्र व्यास घाटी को लौटने लगे हैं। अगले 15-20 दिन में भेड़ पालक अपनी भेड़ों के साथ गुंजी, कुटी स्थित बुग्यालों में पहुंच जाएंगे। मौसम अनुकूल होने से भेड़ पालकों के चेहरे में रौनक है। उनका कहना है कि बुग्यालों में भेड़ों को चरने के लिए पर्याप्त मात्रा में घास मिल जाएगी।
हिमाचल बैजनाथ निवासी सरवन सिंह, नारायण सिंग्वाल ने बताया कि वर्षों से वह कुमाऊं क्षेत्र में रहकर भेड़ पालन का व्यवसाय करते हैं। जब वे छोटे थे तब से अपने पिता के साथ धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भेड़ों को चराने जाते हैं। उन्होंने बताया कि 10 दिन पहले वे हल्द्वानी से चले थे। नैनीपातल, कनालीछीना और ओगला में विश्राम कर वे भेड़ों के साथ जौलजीबी को रवाना होंगे। जौलजीबी में दो दिन विश्राम के बाद वे फिर धारचूला को रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि अभी ऊपरी क्षेत्र में बर्फ है। उनकी कोशिश रहेगी कि 20 मई के बाद ही वे बुग्यालों में पहुंचे। बताया कि कुटी के बुग्यालों में भेड़ों को काफी मुलायम घास मिलती है। अक्टूबर मध्य तक वे भेड़ों को लेकर निचली घाटियों को उतरेंगे।
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हिमाचल बैजनाथ निवासी सरवन सिंह, नारायण सिंग्वाल ने बताया कि वर्षों से वह कुमाऊं क्षेत्र में रहकर भेड़ पालन का व्यवसाय करते हैं। जब वे छोटे थे तब से अपने पिता के साथ धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भेड़ों को चराने जाते हैं। उन्होंने बताया कि 10 दिन पहले वे हल्द्वानी से चले थे। नैनीपातल, कनालीछीना और ओगला में विश्राम कर वे भेड़ों के साथ जौलजीबी को रवाना होंगे। जौलजीबी में दो दिन विश्राम के बाद वे फिर धारचूला को रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि अभी ऊपरी क्षेत्र में बर्फ है। उनकी कोशिश रहेगी कि 20 मई के बाद ही वे बुग्यालों में पहुंचे। बताया कि कुटी के बुग्यालों में भेड़ों को काफी मुलायम घास मिलती है। अक्टूबर मध्य तक वे भेड़ों को लेकर निचली घाटियों को उतरेंगे।
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