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अब पहाड़ में जल्द मिलेगा मुंबई की मरीन ड्राइव का आनंद
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श्रीनगर पंच पीपल से चौरास पुल तक बनने वाली मैरिन ड्राइव की डीपीआर की राह खुली
- फोटो : SHRINAGAR
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लगभग डेढ़ साल की इंतजारी के बाद अलकनंदा नदी किनारे मरीन ड्राइव (सड़क) के डीपीआर बनने की राह खुली है। कई बार की टेंडर प्रक्रिया के बाद दिल्ली की एक कंसल्टेंसी फर्म ने इसके लिए हामी भर ली है। वर्तमान में फर्म के साथ अनुबंध की कार्रवाई चल रही है। साथ ही वर्ष 2020-21 में सड़क की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। खास बात है कि यह जहां श्रीनगर में बायपास का काम करेगी। वहीं पहाड़ घूमने आने वाले लोग मुंबई की तरह मरीन ड्राइव का आनंद भी लेंगे।
साल 2018 में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड को उफल्डा पंचपीपल से श्रीकोट तक अलकनंदा नदी किनारे मरीन ड्राइव के निर्माण के निर्देश दिए। ताकि सैलानी और स्थानीय लोग अलकनंदा नदी किनारे घूम सके। मंत्री के निर्देश पर लोनिवि ने पंचपीपल से चौरास मोटर पुल तक लगभग साढ़े सात किलोमीटर लंबे डबल लेन मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 2018-19 में मरीन ड्राइव को मंजूरी भी दे दी। स्वीकृति के पश्चात लोनिवि ने डीपीआर (विस्तृत योजना रिपोर्ट) के लिए टेंडर डाले। शुरुआत में किसी ने टेंडर नहीं लिया। बाद में फर्मों ने टेंडर लिए, लेकिन तकनीकी अड़चन से टेंडर स्वीकृत नहीं हो पाए। लोनिवि के सहायक अभियंता राजीव शर्मा ने बताया कि कंसल्टेंसी के लिए दिल्ली की एक फर्म के नाम फाइनेंशियल और तकनीकी बिड खुली है। अनुबंध की कार्रवाई चल रही है।
---नदी के ऊपर बनेंगे पिलर
श्रीनगर। प्रस्तावित मरीन ड्राइव श्रीनगर के नीचे और अलकनंदा नदी के किनारे से गुजरेगा। कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध न होने की वजह से वाया डक्ट (नदी के ऊपर पिलर व सड़क) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। जो लोगों को रोमांचित करेगी।
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साल 2018 में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड को उफल्डा पंचपीपल से श्रीकोट तक अलकनंदा नदी किनारे मरीन ड्राइव के निर्माण के निर्देश दिए। ताकि सैलानी और स्थानीय लोग अलकनंदा नदी किनारे घूम सके। मंत्री के निर्देश पर लोनिवि ने पंचपीपल से चौरास मोटर पुल तक लगभग साढ़े सात किलोमीटर लंबे डबल लेन मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 2018-19 में मरीन ड्राइव को मंजूरी भी दे दी। स्वीकृति के पश्चात लोनिवि ने डीपीआर (विस्तृत योजना रिपोर्ट) के लिए टेंडर डाले। शुरुआत में किसी ने टेंडर नहीं लिया। बाद में फर्मों ने टेंडर लिए, लेकिन तकनीकी अड़चन से टेंडर स्वीकृत नहीं हो पाए। लोनिवि के सहायक अभियंता राजीव शर्मा ने बताया कि कंसल्टेंसी के लिए दिल्ली की एक फर्म के नाम फाइनेंशियल और तकनीकी बिड खुली है। अनुबंध की कार्रवाई चल रही है।
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---नदी के ऊपर बनेंगे पिलर
श्रीनगर। प्रस्तावित मरीन ड्राइव श्रीनगर के नीचे और अलकनंदा नदी के किनारे से गुजरेगा। कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध न होने की वजह से वाया डक्ट (नदी के ऊपर पिलर व सड़क) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। जो लोगों को रोमांचित करेगी।
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