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साक्ष्य के अभाव में राशिद और हिमांशु हत्यारोप से बरी
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Mon, 11 May 2015 11:17 PM IST
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वर्ष 2010 में हुए वरुण हत्याकांड में आजीवन कैद की सजा पा चुके सीरियल किलर राशिद उर्फ बुढ़ा और उसके साथी हिमांशु थापा को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में नरकंकाल मामले में हत्या के आरोप से बरी कर दिया है।
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वरुण हत्याकांड के बाद पुलिस ने राशिद की निशानदेही पर नरकंकाल बरामद किया था। लेकिन अभियोजन पक्ष इस मामले में अभियुक्तगण के विरुद्ध यह मामला साबित करने में असफल रहा।
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वरुण हत्याकांड में गिरफ्त में आने के बाद सीरियल किलिंग के आरोपी राशिद उर्फ बुढ़ा ने वरुण के अलावा चार अन्य लोगों को नशा देकर लूटकर हत्या करने की बात कबूली थी। तब अभियुक्त ने पुलिस के साथ चलकर सेंधीखाल मार्ग पर ग्राम सिरोवाड़ी से आगे सड़क पर बने स्कपर से एक नरकंकाल बरामद कराया था।
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जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति की हत्या के आरोप में राशिद और हिमांशु के खिलाफ हत्या, हत्या का षडयंत्र और लूट के मामले में अभियोग दर्जकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
अभियुक्तों ने कोर्ट में उनके खिलाफ लगाए आरोपों से इंकार करते हुए परीक्षण की मांग की। अभियोजन पक्ष की ओर से इसमें नौ गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार अभियुक्त राशीद उर्फ बुढ़ा एक टैक्सी ड्राइवर है और हिमांशु थापा उसका साथी है।
उन्होंने जुलाई 2010 में किसी समय एक अज्ञात व्यक्ति को विषाक्त पदार्थ खिलाकर उसका सामान लूट लिया और हत्याकर शव छिपा दिया। बचाव पक्ष की ओर से न्याय मित्र अधिवक्ता अमित सजवाण ने बताया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके आधार पर कोर्ट उसे दोषी करार देती।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति को मात्र संभावनाओं के आधार पर किसी अपराध के लिए दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। संदेह सबूत का स्थान नहीं दे सकता है। अभियोजन पक्ष अभियुक्तगण के विरुद्ध संदेह से परे अपना मामला साबित करने में असफल रहा है। साक्ष्य के अभाव में उन्हें हत्यारोप समेत सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।