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व्यासघाट और बांघघाट में सितंबर से शुरू होगी एंग्लिंग
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:12 PM IST
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पौड़ी। अल्मोड़ा के मरचुला और चंपावत के पंचेश्वर के बाद अब पौड़ी जिले में भी पर्यटक एंग्लिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। जनपद के व्यासघाट और बांघघाट में इसी वर्ष सितंबर से एंग्लिंग शुरू होने जा रही है। इसके लिए दो समितियां चयनित कर ली गई हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड में अब तक मात्र पंचेश्वर और मरचुला में एंग्लिंग होती आ रही है, लेकिन मत्स्य विभाग की ओर से अब नयार नदी में बांघघाट और व्यासघाट में इसे शुरू किया जा रहा है। इसके लिए बांघघाट में युवक मंगल दल चांदकोट एवं व्यासघाट में मां गंगा स्वयं सहायता समूह का चयन किया गया है। एक वर्ष तक इन समितियों की ओर से यहां एंग्लिंग कराई जाएगी। जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा के मुताबिक ये दोनों ही क्षेत्र महासिर मछली के लिए जाने जाते हैं। पर्यटक यहां आकर एंग्लिंग कर सकेंगे। इसके लिए समितियों के चयन के साथ ही शुल्क भी निर्धारित कर लिया गया है। समितियों को इससे होने वाली आय का बीस फीसदी राजस्व जमा करना होगा।
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एंग्लिंग के लिए आने वाले पर्यटक मछलियों को पकड़ेंगे और उसे वापस नदी में छोड़ देंगे। विदेशी पर्यटकों से इसके लिए दो सौ रुपये, प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर से आने वाले पर्यटकों से डेढ़ सौ रुपये एवं स्थानीय लोगों से बीस रुपये शुल्क लिया जाएगा। -अभिषेक मिश्रा, जिला मत्स्य अधिकारी पौड़ी
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400 ग्राम से अधिक की मछली को ले जा सकेंगे घर
मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एंग्लिंग के दौरान स्थानीय लोग यदि 400 ग्राम से अधिक की मछली पकड़ते हैं तो वे इसका बाजार मूल्य देकर इसे घर ले जा सकेंगे।
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यह है एंग्लिंग
एंग्लिंग हुक के माध्यम से मछली पकड़ने का एक तरीका है। एंग्लर्स प्राकृतिक चारा या फिर आर्टीफिशियल चारा लगाकर मछली पकड़ते हैं। मछली पकड़ने के बाद मछली को वापस नदी में छोड़ दिया जाता है।
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उत्तराखंड में अब तक मात्र पंचेश्वर और मरचुला में एंग्लिंग होती आ रही है, लेकिन मत्स्य विभाग की ओर से अब नयार नदी में बांघघाट और व्यासघाट में इसे शुरू किया जा रहा है। इसके लिए बांघघाट में युवक मंगल दल चांदकोट एवं व्यासघाट में मां गंगा स्वयं सहायता समूह का चयन किया गया है। एक वर्ष तक इन समितियों की ओर से यहां एंग्लिंग कराई जाएगी। जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा के मुताबिक ये दोनों ही क्षेत्र महासिर मछली के लिए जाने जाते हैं। पर्यटक यहां आकर एंग्लिंग कर सकेंगे। इसके लिए समितियों के चयन के साथ ही शुल्क भी निर्धारित कर लिया गया है। समितियों को इससे होने वाली आय का बीस फीसदी राजस्व जमा करना होगा।
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एंग्लिंग के लिए आने वाले पर्यटक मछलियों को पकड़ेंगे और उसे वापस नदी में छोड़ देंगे। विदेशी पर्यटकों से इसके लिए दो सौ रुपये, प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर से आने वाले पर्यटकों से डेढ़ सौ रुपये एवं स्थानीय लोगों से बीस रुपये शुल्क लिया जाएगा। -अभिषेक मिश्रा, जिला मत्स्य अधिकारी पौड़ी
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400 ग्राम से अधिक की मछली को ले जा सकेंगे घर
मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एंग्लिंग के दौरान स्थानीय लोग यदि 400 ग्राम से अधिक की मछली पकड़ते हैं तो वे इसका बाजार मूल्य देकर इसे घर ले जा सकेंगे।
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यह है एंग्लिंग
एंग्लिंग हुक के माध्यम से मछली पकड़ने का एक तरीका है। एंग्लर्स प्राकृतिक चारा या फिर आर्टीफिशियल चारा लगाकर मछली पकड़ते हैं। मछली पकड़ने के बाद मछली को वापस नदी में छोड़ दिया जाता है।