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डेढ़ सौ से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए रहा काला शनिवार
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:56 PM IST
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पौड़ी। गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान के डेढ़ सौ से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। इसके विरोध में कर्मचारियों ने डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संस्थान की ओर से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने डीएम को ज्ञापन भी दिया।
कर्मचारियों ने कहा कि संस्थान में 20 साल से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं, लेकिन बगैर किसी नोटिस के 27 अप्रैल वर्ष 2018 के शासनादेश का हवाला देते हुए कर्मचारियों को एक महीने के लिए बाहर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान के कुछ शिक्षकों ने बैठक कर कर्मचारियों को बाहर करने का यह निर्णय लिया है। कम्रचारियों ने कहा कि आउटसोर्स एजेंसी राइट्स विजन एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से उनकी नियुक्तियां हुई थीं यदि जल्द बहाली न हुई तो कर्मचारी उग्र आंदोलन करेंगे। प्रदर्शनकारियों में पंकज रावत, विनोद, अरुण बिष्ट, इंद्रेश, सुनील कोठारी, ज्ञान सिंह, विनित, विक्रम सिंह, केवल सिंह आदि शामिल रहे।
कोट
मुख्य सचिव के आदेश पर आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। इन कर्मचारियों का इसी वर्ष जनवरी में अनुबंध समाप्त हो गया था, इसके बाद इन्हें तीस जून तक के लिए विस्तार दिया गया। एक अगस्त को कर्मचारियों को फिर से रख लिया जाएगा। वार्ड ब्वाय, वार्ड लेडी आदि 110 कर्मचारी हैं। सिक्योरिटी एवं इमरजेंसी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 15-15 दिन का ब्रेक दिया जाएगा। - डा. महीपाल सिंह चौहान, निदेशक जीबी पंत इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान घुड़दौड़ी।
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इंसेट
कंप्यूटर ऑपरेटरों और अनुसेवकों की सेवाएं समाप्त
पौड़ी। निर्भया योजना के तहत आउटसोर्स एजेंसी पीआरडी के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अनुसेवकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। प्रदेश भर में इन पदों पर पुरुष कर्मचारियों की जगह अब महिला कर्मचारियों को तैनाती दी जाएगी।
निर्भया योजना के तहत वर्ष 2014 में सेल गठित कर इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता, परामर्शदाता, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अनुसेवकों की नियुक्ति की गई थी। पौड़ी में कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अनुसेवक के पद पर पीआरडी के माध्यम से नियुक्ति की गई, लेकिन अब इन पदों पर पुरुष कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को शासनादेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया गया है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अनुसेवकों के पदों पर महिलाओं की अनिवार्य रूप से तैनाती की जाए। इस आदेश के बाद ही विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है।
कर्मचारियों ने कहा कि संस्थान में 20 साल से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं, लेकिन बगैर किसी नोटिस के 27 अप्रैल वर्ष 2018 के शासनादेश का हवाला देते हुए कर्मचारियों को एक महीने के लिए बाहर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान के कुछ शिक्षकों ने बैठक कर कर्मचारियों को बाहर करने का यह निर्णय लिया है। कम्रचारियों ने कहा कि आउटसोर्स एजेंसी राइट्स विजन एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से उनकी नियुक्तियां हुई थीं यदि जल्द बहाली न हुई तो कर्मचारी उग्र आंदोलन करेंगे। प्रदर्शनकारियों में पंकज रावत, विनोद, अरुण बिष्ट, इंद्रेश, सुनील कोठारी, ज्ञान सिंह, विनित, विक्रम सिंह, केवल सिंह आदि शामिल रहे।
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मुख्य सचिव के आदेश पर आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। इन कर्मचारियों का इसी वर्ष जनवरी में अनुबंध समाप्त हो गया था, इसके बाद इन्हें तीस जून तक के लिए विस्तार दिया गया। एक अगस्त को कर्मचारियों को फिर से रख लिया जाएगा। वार्ड ब्वाय, वार्ड लेडी आदि 110 कर्मचारी हैं। सिक्योरिटी एवं इमरजेंसी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 15-15 दिन का ब्रेक दिया जाएगा। - डा. महीपाल सिंह चौहान, निदेशक जीबी पंत इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान घुड़दौड़ी।
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कंप्यूटर ऑपरेटरों और अनुसेवकों की सेवाएं समाप्त
पौड़ी। निर्भया योजना के तहत आउटसोर्स एजेंसी पीआरडी के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अनुसेवकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। प्रदेश भर में इन पदों पर पुरुष कर्मचारियों की जगह अब महिला कर्मचारियों को तैनाती दी जाएगी।
निर्भया योजना के तहत वर्ष 2014 में सेल गठित कर इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता, परामर्शदाता, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अनुसेवकों की नियुक्ति की गई थी। पौड़ी में कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अनुसेवक के पद पर पीआरडी के माध्यम से नियुक्ति की गई, लेकिन अब इन पदों पर पुरुष कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई के निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को शासनादेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया गया है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अनुसेवकों के पदों पर महिलाओं की अनिवार्य रूप से तैनाती की जाए। इस आदेश के बाद ही विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है।