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प्रधान ने किया लाखों का घपला, वसूली के आदेश
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:29 PM IST
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पौड़ी। ग्राम गजेरा की जांच में निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। इस पर ग्राम प्रधान ताजवर सिंह नेगी से 799500 रुपये व तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पूजा खंडूड़ी से 9,803 रुपये वसूल किए जाएंगे। जिलाधिकारी सुशील कुमार ने वसूली के आदेश जारी करने के साथ ही विधिक कार्रवाई भी अमल में लाने के निर्देश दिए हैं।
तहसील चौबट्टाखाल के ग्राम गजेरा में वर्ष 2014-15 में राज्य वित्त से पेयजल टैंक का निर्माण किया गया। ग्रामसभा के विरोध के बाद भी ग्राम प्रधान गजेरा ने पेयजल टैंक का निर्माण किया। जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान ने टैंक निर्माण की जांच में पाया कि प्रधान ने ग्राम सभा के विरोध के बाद भी टैंक का निर्माण किया और इसमें 19,606 रुपये चट कर दिए। गांव में 1.50 लाख रुपये का सीसी मार्ग तैयार किया गया, मगर यह बनते ही उखड़ने लगा। निर्माण को डीपीआरओ ने निष्प्रयोजित घोषित कर दिया। इस मार्ग पर प्रधान ने कुशल श्रमिक के तौर पर 10,625 रुपये का मजदूरी के रूप से भुगतान भी अपने खाते में जमा करवाया। इस मामले में भी प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से वसूली के आदेश दिए गए हैं। बता दें कि ग्राम प्रधान से पूर्व में भी जल निगम पौड़ी 569310 रुपये की वसूली कर चुका है। गजेरा के प्रधान द्वारा लगातार की जा रही अनियमितताओं पर जिलाधिकारी सुशील कुमार ने प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से वसूली के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने मामलों में विधिक कार्रवाई करने के भी आदेश दिए हैं। मामले की शिकायत पूर्व प्रधान विपुल सिंह रावत ने आरटीआई के जरिए ली और जांच के लिए डीपीआरओ को पत्र दिया। डीपीआरओ ने बताया कि मामला गंभीर है। बुधवार को मामले में कार्रवाई अमल में लाई गई है। प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को नोटिस भी भेज दिए गए हैं।
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तहसील चौबट्टाखाल के ग्राम गजेरा में वर्ष 2014-15 में राज्य वित्त से पेयजल टैंक का निर्माण किया गया। ग्रामसभा के विरोध के बाद भी ग्राम प्रधान गजेरा ने पेयजल टैंक का निर्माण किया। जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान ने टैंक निर्माण की जांच में पाया कि प्रधान ने ग्राम सभा के विरोध के बाद भी टैंक का निर्माण किया और इसमें 19,606 रुपये चट कर दिए। गांव में 1.50 लाख रुपये का सीसी मार्ग तैयार किया गया, मगर यह बनते ही उखड़ने लगा। निर्माण को डीपीआरओ ने निष्प्रयोजित घोषित कर दिया। इस मार्ग पर प्रधान ने कुशल श्रमिक के तौर पर 10,625 रुपये का मजदूरी के रूप से भुगतान भी अपने खाते में जमा करवाया। इस मामले में भी प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से वसूली के आदेश दिए गए हैं। बता दें कि ग्राम प्रधान से पूर्व में भी जल निगम पौड़ी 569310 रुपये की वसूली कर चुका है। गजेरा के प्रधान द्वारा लगातार की जा रही अनियमितताओं पर जिलाधिकारी सुशील कुमार ने प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से वसूली के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने मामलों में विधिक कार्रवाई करने के भी आदेश दिए हैं। मामले की शिकायत पूर्व प्रधान विपुल सिंह रावत ने आरटीआई के जरिए ली और जांच के लिए डीपीआरओ को पत्र दिया। डीपीआरओ ने बताया कि मामला गंभीर है। बुधवार को मामले में कार्रवाई अमल में लाई गई है। प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को नोटिस भी भेज दिए गए हैं।
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