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ग्रामीणों को गुलदार के जीना सिखाएगा वन विभाग

Fri, 22 Dec 2017 10:21 PM IST
Updated Fri, 22 Dec 2017 10:21 PM IST
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ग्रामीणों को गुलदार के जीना सिखाएगा वन विभाग
पौड़ी। गांवों के लोग अब गुलदार से डरेंगे नहीं, बल्कि उनके साथ जीवन जीने का तरीका सीखेंगे। मानव वन्य जीव संघर्ष न्यूनीकरण पर हुई मीडिया कार्यशाला में यह जानकारी दी गई। पौड़ी जनपद को वन विभाग व तितली ट्रस्ट मुंबई ने मॉडल के रूप में चुना है। अब ग्रामीणों को गुलदार के साथ रहने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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शुक्रवार को आयुक्त सभागार में मानव वन्य जीव संघर्ष न्यूनीकरण पर मीडिया कार्यशाला हुई। जिलाधिकारी सुशील कुमार व वन संरक्षक गढ़वाल मान सिंह ने इसका शुुुुभारंभ किया। जिलाधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि गुलदार आबादी की ओर बढ़ रहे हैं और ऐसे में बेहद जरूरी है कि घटनाओं के लिए लोगों को वन्य जीवों के साथ रहना सिखाया जाए। वन संरक्षक गढ़वाल ने वन विभाग व ट्रस्ट की कार्य योजना की जानकारी दी। तितली ट्रस्ट के संजय सोढ़ी ने संजय गांधी नेशनल पार्क मुंबई में लिविंग विद टाइगर प्रोजेक्ट की जानकारी दी। बताया कि महाराष्ट्र में अब गुलदार व मानव का मेल इसलिए भी हो गया है कि दोनों एक दूसरे को समझने लगे हैं। इस अवसर पर वन क्षेत्राधिकारी अनिल भट्ट, रश्मि ध्यानी, ललित नेगी, एलएम लोहनी, सुमेर सिंह, तितली ट्रस्ट के राजेश भट्ट आदि मौजूद रहे।
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पीडब्लूडी व आशाओं पर बिफरे उप वन संरक्षक गढ़वाल
उप वन संरक्षक गढ़वाल लक्ष्मण सिंह रावत ने कहा कि गुलदार छाड़ियों में छुपकर वार करता है। लोक निर्माण विभाग सड़कों के किनारे झाड़ियों नहीं काट रहा है और ऐसे में गुलदार का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकत्रियों को प्रत्येक ग्राम सभा के हिसाब से 10,000 रुपये हर साल झांड़ी काटने के लिए मिल रहे हैं, लेकिन ग्राउंड पर कुछ भी नहीं हो रहा है।
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