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पौड़ी में आईआरएस सिस्टम की खुली पोल
Updated Sun, 01 Jul 2018 09:56 PM IST
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पौड़ी। जिले के धूमाकोट में रविवार को हुए बस हादसे ने आईआरएस की भी पोल खोल दी। भीषण बस दुर्घटना के बावजूद जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में अधिकारी नदारद रहे। सुबह साढ़े ग्यारह बजे जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। इसके बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे भी कार्यालय में कोई अधिकारी नहीं मिला, जबकि इस सिस्टम से 39 अधिकारी जुड़े हैं।
जिले में कहीं भी आपदा आने पर राहत एवं बचाव कार्य को लेकर आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) का गठन किया गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित इस सिस्टम से इक्का दुक्का नहीं बल्कि 39 अधिकारी जुड़े हैं, लेकिन रविवार के दिन इतने बड़े हादसे के बावजूद कार्यालय से अधिकारी नदारद रहे। कार्यालय में शाम पौने चार बजे जिला शिक्षा अधिकारी हरेराम यादव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जगदंबा प्रसाद पुरोहित ने पहुंचकर कामकाज देखा। अधिकारियों के मौजूद न होने से राहत एवं बचाव कार्य निगरानी में जुटे कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ी। पहले ही जिले में तहसीलदार एवं एसडीएम के कई पद रिक्त हैं। ऐसे में जो अधिकारी हैं, उनके भी नदारद रहने से राहत एवं बचाव कार्य निगरानी में दिक्कतें पेश आई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश चंद काला का कहना है कि उपजिलाधिकारी एवं कुछ अन्य अधिकारी घटनास्थल पर गए थे। इसके अलावा कुछ अन्य अधिकारी पौड़ी में रहकर ही स्थिति पर निगरानी रखे थे।
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जिले में कहीं भी आपदा आने पर राहत एवं बचाव कार्य को लेकर आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) का गठन किया गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित इस सिस्टम से इक्का दुक्का नहीं बल्कि 39 अधिकारी जुड़े हैं, लेकिन रविवार के दिन इतने बड़े हादसे के बावजूद कार्यालय से अधिकारी नदारद रहे। कार्यालय में शाम पौने चार बजे जिला शिक्षा अधिकारी हरेराम यादव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जगदंबा प्रसाद पुरोहित ने पहुंचकर कामकाज देखा। अधिकारियों के मौजूद न होने से राहत एवं बचाव कार्य निगरानी में जुटे कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ी। पहले ही जिले में तहसीलदार एवं एसडीएम के कई पद रिक्त हैं। ऐसे में जो अधिकारी हैं, उनके भी नदारद रहने से राहत एवं बचाव कार्य निगरानी में दिक्कतें पेश आई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश चंद काला का कहना है कि उपजिलाधिकारी एवं कुछ अन्य अधिकारी घटनास्थल पर गए थे। इसके अलावा कुछ अन्य अधिकारी पौड़ी में रहकर ही स्थिति पर निगरानी रखे थे।
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