फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   The President did not just send a message to Shivraj Singh

शिवराज सिंह को राष्ट्रपति ने यूं ही नहीं भेजा संदेश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Aug 2021 03:08 AM IST
विज्ञापन
The President did not just send a message to Shivraj Singh
हल्द्वानी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवराज सिंह को यूं ही नहीं आया। भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें 19 कोड़े खाने पड़े थे, लेकिन देशभक्ति से प्रेरित और आजादी की लड़ाई लड़ने वाले जवां खून के फौलादी इरादों को अंग्रेज न डिगा सके, नतीजन उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। जवानी के दिनों में कई सालों तक दिन में एक समय का भोजन करते थे।
विज्ञापन

अमरावती कालोनी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवराज सिंह फर्त्याल (96) मूलत: अल्मोड़ा जनपद के लमगड़ा ब्लाक के कपकोट ग्रामसभा निवासी हैं। नानतिन महाराज के अनन्य भक्त शिवराज को बुढ़ापे ने एक खटिया में सीमित कर दिया है। जब वह स्कूल पढ़ा करते थे तो उनके फौलादी इरादों को देखकर उनके साथी भी अचंभित रह जाते थे। हर भारतीय की तरह अंग्रेजों की गुलामी उन्हें भी पसंद नहीं थी। जीआईसी अल्मोड़ा में दसवीं में पढ़ते समय उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने पर तब उन्हें पकड़ लिया गया। उनकी छोटी उम्र देखकर उन्हें जेल में नहीं डाला गया लेकिन 19 कोड़े लगाने का हुक्म दिया गया। अंग्रेजों का दिल यहां भी नहीं पसीजा तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। हालांकि एक साल बाद फिर वह स्कूल में दाखिल हुए और दसवीं की परीक्षा दी।
विज्ञापन

साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिवराज सिंह अक्सर अपनी बहू कमला और शुभचिंतकों को किस्से सुना दिया करते थे लेकिन अब उम्र बढ़ने के साथ उनका बोलना कम हो गया और सुनाई भी बहुत कम पड़ता है लेकिन इशारों में वह काफी कुछ कह जाते हैं। शिवराज सिंह के बड़े बेटे जितेंद्र सिंह बताते हैं कि हर साल उनके पिता को सम्मानित करने सरकारी अफसर बुला ले जाते हैं। बीते सोमवार को राष्ट्रपति का संदेश लेकर प्रशासनिक अधिकारी उनके घर आए थे और उन्हें सम्मानित किया था। शिवराज के एक बेटे केएस फर्त्याल कर्नल पद से रिटायर्ड हैं। सबसे छोटे डीपी सिंह कोलकाता में एक कंपनी में अधिकारी हैं। उनकी देखभाल उनके बड़े बेटे और बहू करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed