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कंपकंपाती ठंड में भी छूटेगा प्रत्याशियों का पसीना
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Politics in Pithauragarh
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भक्त दर्शन पांडेय
पिथौरागढ़। विधानसभा चुनावों की तिथि का एलान हो गया है। पिथौरागढ़ जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों के लिए मतदाताओं तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सीमांत की विधानसभा क्षेत्रों के कई गांव ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए प्रत्याशियों को कंपकंपाती ठंड में भी पसीना बहाना होगा। इस दौरान नेताजी विकास की हकीकत से भी रूबरू होंगे।
पिथौरागढ़ जिले में पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला और गंगोलीहाट चार विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से धारचूला विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश इलाके दुरूह और दुर्गम हैं। धारचूला विधानसभा में धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र शामिल हैं। इनमें मुनस्यारी के नामिक, पातो, बुई, क्वीरीजीमिया, साईपोलू और धारचूला के सुमदुंग, जयकोट, कनार सहित सैकड़ों गांव और तोक सड़कों से दूर हैं।
कई गांवों में मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी भी नहीं है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को 20 से 25 किमी पैदल चलना पड़ता है। डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में भी काणाधार, मितड़ा गांव में पहुंचने के लिए आठ से 10 किमी पैदल चलना पड़ता है। गंगोलीहाट का सुरखालपाठक गांव भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सका है।
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यहां के ग्रामीणों, महिलाओं और छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन 20 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हल्दू और भौरा सहित कई गांव ऐसे हैं जहां तक अभी सड़क नहीं पहुंच पाई है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए कहीं खड़ी चढ़ाई तो कहीं सीधी ढलान पर उतरना पड़ता है। ऐसे में एक-एक मतदाता तक पहुंचने के लिए प्रत्याशियों को पसीना बहाना होगा।
पांच साल पहले विकास के दावे के साथ इन गांवों में जा चुके नेताजी एक बार फिर कई वादों और दावों के साथ वोट के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों को नापते हुए इन गांवों के मतदाताओं तक पहुंचेंगे। ऐसे में प्रत्याशियों को पांच साल पूर्व किए गए विकास कार्यों के दावों और मौजूदा हकीकत से रूबरू होने का भी मौका मिलेगा।
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पिथौरागढ़। विधानसभा चुनावों की तिथि का एलान हो गया है। पिथौरागढ़ जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों के लिए मतदाताओं तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सीमांत की विधानसभा क्षेत्रों के कई गांव ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए प्रत्याशियों को कंपकंपाती ठंड में भी पसीना बहाना होगा। इस दौरान नेताजी विकास की हकीकत से भी रूबरू होंगे।
पिथौरागढ़ जिले में पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला और गंगोलीहाट चार विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से धारचूला विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश इलाके दुरूह और दुर्गम हैं। धारचूला विधानसभा में धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र शामिल हैं। इनमें मुनस्यारी के नामिक, पातो, बुई, क्वीरीजीमिया, साईपोलू और धारचूला के सुमदुंग, जयकोट, कनार सहित सैकड़ों गांव और तोक सड़कों से दूर हैं।
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कई गांवों में मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी भी नहीं है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को 20 से 25 किमी पैदल चलना पड़ता है। डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में भी काणाधार, मितड़ा गांव में पहुंचने के लिए आठ से 10 किमी पैदल चलना पड़ता है। गंगोलीहाट का सुरखालपाठक गांव भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सका है।
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यहां के ग्रामीणों, महिलाओं और छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन 20 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हल्दू और भौरा सहित कई गांव ऐसे हैं जहां तक अभी सड़क नहीं पहुंच पाई है। इन गांवों तक पहुंचने के लिए कहीं खड़ी चढ़ाई तो कहीं सीधी ढलान पर उतरना पड़ता है। ऐसे में एक-एक मतदाता तक पहुंचने के लिए प्रत्याशियों को पसीना बहाना होगा।
पांच साल पहले विकास के दावे के साथ इन गांवों में जा चुके नेताजी एक बार फिर कई वादों और दावों के साथ वोट के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों को नापते हुए इन गांवों के मतदाताओं तक पहुंचेंगे। ऐसे में प्रत्याशियों को पांच साल पूर्व किए गए विकास कार्यों के दावों और मौजूदा हकीकत से रूबरू होने का भी मौका मिलेगा।