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ओटीएस स्कीम: 17 महीने में केवल 45 केस हुए फाइनल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 12:36 AM IST
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OTS Scheme: Only 45 cases finalized in 17 months
हल्द्वानी। अनाधिकृत निर्माण के मामलों में जुर्माना जमा करने समेत अन्य शर्तों को पूरा करते हुए नियमितीकरण कराने की वन टाइम सेटेलेमेंट स्कीम सफल होती नहीं दिख रही है। इस स्कीम को तीन बार बढ़ाया गया, लेकिन 17 महीने में जिले में केवल 45 मामले फाइनल हो सके हैं।
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शासन ने पिछले साल 24 मार्च को वन टाइम सेटेलेमेंट स्कीम लागू की थी। इसके तहत अगर किसी ने तय नक्शे आदि के विपरीत कोई निर्माण दिसंबर-2020 से पूर्व किया है तो वह स्कीम की शर्तों, जुर्माना समेत अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए उसे नियमित करा लें। इसमें जुर्माने की दर में छूट प्रदान करते हुए वर्ष-2012 कर रखी गई। पहले योजना को छह महीने के लिए लागू किया गया। फिर इसे पांच अक्तूबर तक और अब 30 सितंबर तक बढ़ाया गया। इसके बावजूद लोग जिला विकास प्राधिकरण के कार्यालय तक नहीं पहुंच रहे हैं।
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जिला विकास प्राधिकरण कार्यालय में केवल 113 मामले पहुंचे हैं। इनमें छह निरस्त हो गए। केवल 45 फाइनल स्टेज तक पहुंचे। 62 पर काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि कई लोगों ने आवेदन कर फाइल तैयार करवाई तो भारी भरकम जुर्माना राशि देखकर ठिठक गए।
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साढ़े तीन करोड़ से अधिक का राजस्व मिला
हल्द्वानी। जो केस फाइनल हुए हैं, उनसे 3,67,25958 का राजस्व मिला है, जबकि आवेदन से नौ लाख से अधिक राजस्व मिला है। मौजूदा समय में जिला विकास प्राधिकरण के कार्यालयों में व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक के हर महीने औसतन 240 नक्शे पास होने के लिए पहुंचते हैं।
कई प्रक्रियाओं को पूरा करना होता
हल्द्वानी। वन टाइम सेटेलमेंट के तहत कई प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है। मसलन व्यावसायिक मामला है तो पहले आवेदन करने के साथ आवेदन फीस जमा करनी होती है। अगले चरण में अग्निशमन, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, तहसील की एनओसी लेकर प्राधिकरण कार्यालय में जमा करनी होती है। इसके बाद साइट विजिट के निरीक्षण आदि की फीस तय होती है जिसे जमा किया जाता है।

कोट ==
ओटीएस स्कीम संचालित की जा रही है। यह योजना लोगों की सुविधा के लिए है, इसके माध्यम से वे नियमितीकरण करा सकते हैं। कई बार लोग फाइल तैयार करवा लेते हैं, बाद में आगे की प्रक्रिया को पूरा नहीं करते हैं। अभी भी स्कीम का समय बाकी है जिनके भी ऐसे प्रकरण हैं वे नियमितीकरण कराकर भविष्य में होने वाली परेशानी से बच सकते हैं।
-ऋचा सिंह, संयुक्त सचिव, जिला विकास प्राधिकरण।
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