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Nainital News: न शिकार की जगह का पता, न बाघ की मौत का रिकाॅर्ड

Tue, 30 Jan 2024 03:45 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Tue, 30 Jan 2024 03:45 AM IST
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Neither the address of the hunting place nor the record of the tiger's death.
प्रतीकात्मक
हल्द्वानी। बाघ की मौत और उसके शिकार को लेकर राज्य से लेकर केंद्र की एजेंसी की कार्यप्रणाली सवालों में है। कुमाऊं में दो बाघों की मौत हो चुकी है, पर चौंकाने वाली बात यह है कि बाघों की संख्या से लेकर मौत तक का रिकार्ड रखने वाले नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी (एनटीसीए) की वेबसाइट पर सूचना नहीं है। दूसरी तरफ जंगलात करीब दो साल में बाघ की पांच खाल बरामद कर चुका है, पर इन बाघों का शिकार कहां हुआ, इसका पता नहीं चल सका है।
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बीती सात जनवरी को तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत टांडा रेंज में वाहन की टक्कर से बाघ की मौत हो गई थी। 22 दिन बाद भी नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी की वेबसाइट पर उसकी कोई सूचना नहीं है, जबकि इस वेबसाइट पर पूरे देश में बाघ की मौत, स्थल, तारीख समेत अन्य विवरण होते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि बाघ की मौत की सूचना का उल्लेख नहीं किया है। पिछले साल फरवरी में अल्मोड़ा वन प्रभाग के जौरासी में बाघ की मौत हो गई थी, इस बाघ की मौत की सूचना भी एनटीसीए की वेबसाइट पर सूचना नहीं थी।
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कहां हुआ, बाघ का शिकार, बना है सवाल
हल्द्वानी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टीम वर्ष-2022 में हरिद्वार वन प्रभाग में तराई केंद्रीय वन प्रभाग टीम ने दो बाघ की खाल बरामद की थी, इनका शिकार कहां हुआ, यह आज तक रहस्य बना हुआ है। पिछले साल तराई पूर्वी वन प्रभाग और एसटीएफ की टीम ने जुलाई में एक बाघ की खाल को बरामद किया था। इसके बाद सितंबर में वन विभाग और एसटीएफ ने दो बाघों की खाल बरामद की। इस मामले में भी महीनों गुजर जाने के बाद भी पता नहीं चल सका है कि बाघ का शिकार कहां हुआ था। वन विभाग ने इस मामले में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से भी मदद मांगी है।
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प्रभागीय वनाधिकारी तराई केंद्रीय वन प्रभाग हिमांशु ने बताया कि बाघ की मौत होती है तो इसकी सूचना प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव समेत अन्य को भेजी जाती है। वर्ष-2022 में दो बाघ की खाल बरामदगी के बारे में जानकारी नहीं है। इसके बाद जो खाल बरामद हुई है, उसकी जानकारी के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया को पत्र लिखा है। इसके अलावा बाघ का शिकार कहां हुआ, यह जांच का विषय है। इसमें हर पहलू को देखना होता है।

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