{"_id":"5759c7ff4f1c1bc1459c60ac","slug":"more-robust-disaster-management-authority","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अब और अधिक मजबूत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अब और अधिक मजबूत
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Fri, 10 Jun 2016 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत के जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को अब और अधिक मजबूत करते हुये प्राधिकरण के तहत प्रबंधन परियोजना इकाई (पीआईयू) का भी गठन कर दिया गया है। जिलाधिकारी चंपावत की निगरानी में यह इकाई अब पूर्णागिरी के तीन किलोमीटर तक के ट्रैक रूट के सुधारीकरण और पुनर्निर्माण का काम कर सकेगी। परियोजना प्रबंधन इकाई को करीब पांच करोड़ रुपये तक की धनराशि खर्च करने का अधिकार भी दिया गया है।
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक प्रबंधन परियोजना इकाई जिलाधिकारी चंपावत की निगरानी में काम करेगी। इस इकाई को पूर्णागिरी ट्रैक रूट के सभी निर्माण, सुधारीकरण आदि का जिम्मा भी सौंपा गया है। इसके अलावा शासन स्तर से अगर कोई और कार्य भी करने को कहा जाता है तो यह इकाई उस काम को भी पूरा करेगी। परियोजना प्रबंधन इकाई को टुकड़ों-टुकड़ों में काम करने के लिए भी आजादी दी गई है। इसके तहत अधिकतम पांच करोड़ रुपये खर्च किये जा सकेंगे। निर्माण कार्य का काम एक सिविल इकाई करेगी और जिला प्राधिकरण से इसके गठन का प्रस्ताव भी मांगा गया है।
आपदा के लिहाज से संवेदनशील
हल्द्वानी। चंपावत का पूर्णागिरी क्षेत्र आपदा के लिहाज से भी संवेदनशील है। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 91 राजस्व ग्राम हैं। इसमें से 35 राजस्व ग्राम टनकपुर और बनबसा के मैदानी क्षेत्रों में हैं। यही क्षेत्र बरसात के समय बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में बरसात के मौसम में बादल फटने जैसी घटनाओं का लोगों को सामना करना पड़ रहा है। मुसीबत यह है कि 38 किलोमीटर लंबे धूनाघाट-भिगराड़ा-रीठा मोटर मार्ग के लिए आपदा के समय कोई वैकल्पिक मार्ग भी अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक प्रबंधन परियोजना इकाई जिलाधिकारी चंपावत की निगरानी में काम करेगी। इस इकाई को पूर्णागिरी ट्रैक रूट के सभी निर्माण, सुधारीकरण आदि का जिम्मा भी सौंपा गया है। इसके अलावा शासन स्तर से अगर कोई और कार्य भी करने को कहा जाता है तो यह इकाई उस काम को भी पूरा करेगी। परियोजना प्रबंधन इकाई को टुकड़ों-टुकड़ों में काम करने के लिए भी आजादी दी गई है। इसके तहत अधिकतम पांच करोड़ रुपये खर्च किये जा सकेंगे। निर्माण कार्य का काम एक सिविल इकाई करेगी और जिला प्राधिकरण से इसके गठन का प्रस्ताव भी मांगा गया है।
विज्ञापन
आपदा के लिहाज से संवेदनशील
हल्द्वानी। चंपावत का पूर्णागिरी क्षेत्र आपदा के लिहाज से भी संवेदनशील है। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 91 राजस्व ग्राम हैं। इसमें से 35 राजस्व ग्राम टनकपुर और बनबसा के मैदानी क्षेत्रों में हैं। यही क्षेत्र बरसात के समय बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में बरसात के मौसम में बादल फटने जैसी घटनाओं का लोगों को सामना करना पड़ रहा है। मुसीबत यह है कि 38 किलोमीटर लंबे धूनाघाट-भिगराड़ा-रीठा मोटर मार्ग के लिए आपदा के समय कोई वैकल्पिक मार्ग भी अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है।
विज्ञापन