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रेंजर के खिलाफ खोला मोर्चा
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:48 AM IST
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हल्द्वानी। विवादित रेंजर के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। टांडा रेंज कर्मियों ने रेंजर पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए रेंजर के साथ काम करने में असमर्थता जताते हुए तबादले की मांग की है।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज में तकरीबन 25-30 कर्मियों का स्टाफ है। इनमें 24 कर्मियों ने डीएफओ कल्याणी नेगी को ज्ञापन भेजा। इसमें उन्होंने बताया कि रेंजर मेहता कर्मियों के साथ अपशब्दों का प्रयोग, मारपीट करते हैं। विभागीय कार्यों में रुचि नहीं लेते हैं। इसकी वजह से वन प्रभाग के वित्तीय लक्ष्य पूरे नहीं हो सकेंगे। इसका खामियाजा निचले कर्मियों को भुगतना हो सकता है। सभी ने एक सुर में रेंजर पर उत्पीड़न का आरोप लगा कार्य करने में असमर्थता जताई है। उन्होंने डीएफओ से तबादला करने की मांग की है। वहीं रेंजर के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
रेंजर पर ये हैं आरोप
- कर्मियों के साथ अपशब्दों का प्रयोग एवं मारपीट करना
- फील्ड कर्मियों के बीटों में जारी परमिट के आधार पर गलत काम करवाना
- राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता, गणतंत्र दिवस, वन्य जीव सुरक्षा सप्ताह, पर्यावरण दिवस पर रेंज ऑफिस न आना
- रात में रेंज मुख्यालय से गायब रहना
- मातहतों में जातिवाद फैलाकर वैमनस्य करवाना
- खाने का सामान मंगाकर भुगतान न करना
- अफसरों को देने के नाम पर पौधरोपण कार्य के चौकीदारों के वेतन से 30 फीसदी कमीशन काटना
- वन्यजीव व उत्पाद तस्करों को बढ़ावा देना
- वर्षाकालीन अग्रिम रोपण के लिए मृदा कार्य न करवाना, इससे पौधरोपण प्रभावित होगा
इन कर्मियों ने तबादला मांगा
सलीम, प्रेम सिंह, आरपी पांडे, सोनू देवी, गुरमेख सिंह, लक्ष्मण सिंह नेगी, महेंद्र कौर, उमेश चंद्र जोशी, सुरेंद्र सिंह, संपूर्णानंद, हीरा गौनिया, पूरन सिंह, मनोज मेलकानी, तारा दत्त, चंद्र मोहन जोशी, हेम चंद्र आर्य, कुंवर सेन, राम सिंह, अंकित जायसवाल, जतन पाल, हरीश सिंह, पंकज बिष्ट
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11 माह के कार्यकाल में विवाद ही विवाद
रेंजर भूपाल सिंह मेहता ने अगस्त 2017 में टांडा रेंज का कार्यभार संभाला। तब से वह चार-पांच बार सुर्खियों में आ चुके हैं। चौकीदार की पत्नी से अभद्रता, सह कर्मियों से दो बार गालीगलौज, मारपीट, रेलवे को हस्तांतरित वन भूमि में पेड़ कटान, तस्करी से जब्त लट्ठों में मोटे लट्ठों को पतले से बदलवाना। इनमें तीन में आपसी समझौता हो गया है जबकि दो में जांच चल रही है। जब वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने छिलका गुलिया घोटाले की रिपोर्ट बनाई तो उसमें भी मेहता का नाम आया था।
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज में तकरीबन 25-30 कर्मियों का स्टाफ है। इनमें 24 कर्मियों ने डीएफओ कल्याणी नेगी को ज्ञापन भेजा। इसमें उन्होंने बताया कि रेंजर मेहता कर्मियों के साथ अपशब्दों का प्रयोग, मारपीट करते हैं। विभागीय कार्यों में रुचि नहीं लेते हैं। इसकी वजह से वन प्रभाग के वित्तीय लक्ष्य पूरे नहीं हो सकेंगे। इसका खामियाजा निचले कर्मियों को भुगतना हो सकता है। सभी ने एक सुर में रेंजर पर उत्पीड़न का आरोप लगा कार्य करने में असमर्थता जताई है। उन्होंने डीएफओ से तबादला करने की मांग की है। वहीं रेंजर के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
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रेंजर पर ये हैं आरोप
- कर्मियों के साथ अपशब्दों का प्रयोग एवं मारपीट करना
- फील्ड कर्मियों के बीटों में जारी परमिट के आधार पर गलत काम करवाना
- राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता, गणतंत्र दिवस, वन्य जीव सुरक्षा सप्ताह, पर्यावरण दिवस पर रेंज ऑफिस न आना
- रात में रेंज मुख्यालय से गायब रहना
- मातहतों में जातिवाद फैलाकर वैमनस्य करवाना
- खाने का सामान मंगाकर भुगतान न करना
- अफसरों को देने के नाम पर पौधरोपण कार्य के चौकीदारों के वेतन से 30 फीसदी कमीशन काटना
- वन्यजीव व उत्पाद तस्करों को बढ़ावा देना
- वर्षाकालीन अग्रिम रोपण के लिए मृदा कार्य न करवाना, इससे पौधरोपण प्रभावित होगा
इन कर्मियों ने तबादला मांगा
सलीम, प्रेम सिंह, आरपी पांडे, सोनू देवी, गुरमेख सिंह, लक्ष्मण सिंह नेगी, महेंद्र कौर, उमेश चंद्र जोशी, सुरेंद्र सिंह, संपूर्णानंद, हीरा गौनिया, पूरन सिंह, मनोज मेलकानी, तारा दत्त, चंद्र मोहन जोशी, हेम चंद्र आर्य, कुंवर सेन, राम सिंह, अंकित जायसवाल, जतन पाल, हरीश सिंह, पंकज बिष्ट
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11 माह के कार्यकाल में विवाद ही विवाद
रेंजर भूपाल सिंह मेहता ने अगस्त 2017 में टांडा रेंज का कार्यभार संभाला। तब से वह चार-पांच बार सुर्खियों में आ चुके हैं। चौकीदार की पत्नी से अभद्रता, सह कर्मियों से दो बार गालीगलौज, मारपीट, रेलवे को हस्तांतरित वन भूमि में पेड़ कटान, तस्करी से जब्त लट्ठों में मोटे लट्ठों को पतले से बदलवाना। इनमें तीन में आपसी समझौता हो गया है जबकि दो में जांच चल रही है। जब वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने छिलका गुलिया घोटाले की रिपोर्ट बनाई तो उसमें भी मेहता का नाम आया था।