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जनता को नहीं कांग्रेसियों को चाहिए मोदी से हिसाब
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Wed, 21 Sep 2016 01:57 AM IST
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कांग्रेस
- फोटो : file photo
कांग्रेस की ‘भाजपा जवाब दो, मोदी हिसाब दो’ जनसभा उम्मीद और दावों के मुकाबले कमतर साबित हुई।। रैली में काफिला तो नजर आया, लेकिन रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में मोदी से हिसाब मांगने वाले काफी घट गए।
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जनसभा में करीब डेढ़ हजार लोग शामिल हुए। सभा के अंत तक ये संख्या और घट गई। बनभूलपुरा इलाके से अलग-अलग गुटों में पहुंची भीड़ और एनएसयूआई से जुड़े कार्यकर्ताओं ने जनसभा में पहुंचकर कार्यक्रम में संख्या बल बढ़ाया।
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वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश मुख्यमंत्री हरीश रावत सरकार में सबसे कद्दावर नेता हैं। हल्द्वानी उनकी विधानसभा है। अब्दुल मतीन सिद्दीकी के कांग्रेस में शामिल होने से वित्तमंत्री की ताकत बढ़ी है। कांग्रेस हर रोज किसी न किसी वार्ड में सदस्यता अभियान चलाकर जनाधार बढ़ाने का दावा करती है।
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मंगलवार को कांग्रेस के ‘भाजपा जवाब दो, मोदी हिसाब दो’ कार्यक्रम में दावों के मुताबिक मोदी से हिसाब मांगने नहीं पहुंच पाई। इस कार्यक्रम के लिए वित्तमंत्री डा. हृदयेश और मंडी सभापति सुमित हृदयेश ने खासी ताकत झोंकी थी।
हर कांग्रेसी नेता को जिम्मेदारी सौंपी थी। किसी नेता को बसों से अलग-अलग जगहों से लोगों को रामलीला मैदान तक पहुंचाने की तो किसी को मैदान में कुर्सियां लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
रैली एमबीपीजी कालेज से अपराह्न चार बजे शुरू हुई। रैली रामलीला मैदान में जनसभा में बदल गई। रैली में रेला नजर आया। दरअसल, रैली में हाइवे पर चलने वाले वाहन भी फंस गए और भीड़ का हिस्सा बन गए।
सुमित हृदयेश रैली की अगुवाई करते हुए सबसे पहले रामलीला मैदान पहुंचे। वहां मैदान में गिनती की करीब चार सौ कुर्सियां देख गुस्से से लाल हो गए। सुमित हृदयेश ने रामलीला कमेटी कार्यालय के पास रखी कुर्सियों को लगवाया।
इसके बाद भी मैदान में करीब पांच सौ से अधिक कुर्सियां नहीं लग पाईं। कुर्सियां न मिलने पर लोग सीढ़ियों पर बैठ गए। सैकड़ों लोग मैदान में ही खड़े होकर वित्तमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष को सुनने लगे। मैदान में खड़े-खड़े लोगों के पैर थकने लगे और जनसभा खत्म होने से पहले ही खिसकना शुरू हो गए।