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चावल के 46 में से 39 सैंपल फेल
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Tue, 25 Jul 2017 02:21 AM IST
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- फोटो : demo pic
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जिसकी आशंका थी, वही हुआ। पीडीएस, स्टेट पूल के मंडी और कमलुवागांजा गोदाम से लिए गए चावल के 46 सैंपल में से 39 सैंपल फेल हो गए हैं। यह तब है जबकि इस रिपोर्ट में फेरबदल करने की भी भरपूर कोशिश हुई।
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खराब चावल खरीदने और उसे कुमाऊं में खपाने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) बीएस धनिक ने डीएसओ तेजबल की अगुवाई में प्रभारी उप संभागीय विपणन अधिकारी और रामनगर के सीनियर विपणन अधिकारी की जांच कमेटी बनाई थी।
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जांच कमेटी ने पीडीएस गोदाम से एक, स्टेट पूल के मंडी गोदाम से 30 और कमलुवागांजा के स्टेटपूल गोदाम से 15 सैंपल भरे थे। जांच कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट आरएफसी कुमाऊं को सौंप दी है। आरएफसी कुमाऊं वीएस धनिक ने बताया कि मंडी से लिए गए चावल के सैंपल में से 26 सैंपल और कमलुवागांजा के 13 सैंपल फेल हो गए हैं।
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पीडीएस गोदाम का लिया एक सैंपल पास हो गया है। एक चट्टे में 1800 क्विंटल चावल रखा जाता है। इस हिसाब से 70200 क्विंटल चावल खराब पाया गया है। दोनों गोदाम में लगभग 2.10 लाख क्विंटल चावल भरा हुआ है। इसमें से केवल आधे से भी कम चावल के सैंपल भरे गए थे।
आखिरकार कैसे पास हो गया पीडीएस गोदाम का सैंपल
पीडीएस गोदाम में मंडी के स्टेट पूल गोदाम से चावल भेजा जाता है। मंडी के चावल के लिए गए सैंपल में से 26 सैंपल फेल हो गए। ऐसे में पीडीएस गोदाम के चावल का सैंपल कैसे पास हो गया। यह बड़ा सवाल है। जब अमर उजाला की टीम ने इन चावल का जायजा लिया था तो गोदाम में पीला-टूटा चावल के अलावा भीगा हुआ चावल भी था।
पीडीएस गोदाम में जांच के दौरान खुद डीएसओ ने उस दिन चावल को खराब बताया था और इन डीएसओ ने सैंपल लेने के बाद बिना जांच रिपोर्ट आए नैनीताल जिले में यह चावल भेज दिया था। इसके बाद आए डीएसओ ने भी चावल जिले के सस्ता गल्ला दुकानों को भेजा। डीएम दीपेंद्र चौधरी ने दोनों डीएसओ से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था। अब कहा जा रहा है कि अपने को बचाने के लिए जांच अधिकारी ने ये सैंपल पास कराया।
जांच अधिकारी ही सवाल के घेरे में
डीएसओ, प्रभारी उपसंभागीय विपणन अधिकारी और सीनियर विपणन अधिकारी की टीम की रिपोर्ट में ही सवालिया निशान लग रहे हैं। जब इन अधिकारियों ने सैंपल भरे थे, उस दौरान सैंपल को सील नहीं किया गया था।
वहीं उस अधिकारी को जांच टीम का अधिकारी बना दिया गया, जिन्होंने खराब चावल जिले में भेजा था। जब खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रभारी संभागीय विपणन अधिकारी पहले से ही इन गोदाम की जांच करने के लिए अधिकृत थे तो उन्होंने यह मामला उठाने से पहले जांच क्यों नहीं की।
यह है कार्रवाई का नियम
खराब चावल पाए जाने पर चावल की छटाई का काम चलता है। खराब चावल को मिलों को वापस किया जाता है। मिल के वापस नहीं लेने की दशा में मिलों को ब्लैक लिस्ट कर इस चावल की नीलामी होती है। नीलामी में बिके चावल और सरकार की ओर से खरीदे गए चावल का मूल्य का अंतर कर्मचारियों से वसूला जाता है। साथ ही कर्मचारियों को भी निलंबित भी किया जाता है।
चावल की सैंपल रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में चावल के सैंपल रिपोर्ट फेल हो गई है। अधोमानक चावल की जिम्मेदारी स्टेट वेयर हाउस कॉरपोरेशन की होती है। ये ही विभाग इसका निस्तारण करता है। विभाग के अधिकारियों ने यह चावल खरीदा है, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।
- वीएस धनिक संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं