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कबूतरी देवी समेत माहभर में तीन कलाकारों की क्षति

Sun, 08 Jul 2018 02:09 AM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 02:09 AM IST
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कबूतरी देवी समेत माहभर में तीन कलाकारों की क्षति
हल्द्वानी। कबूतरी देवी के निधन के साथ ही कुमाऊं के लोक संगीत और लोककला को बड़ा झटका लगा है। एक महीने के अंतराल में कुमाऊं के तीन महान लोक कलाकार दुनिया को अलविदा कह गए हैं। इनके निधन से कुमाऊंनी लोकसंगीत को भारी क्षति पहुंची है। इनकी भरपाई काफी कठिन है।
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कुमाऊं के उभरते युवा कलाकार पप्पू कार्की का निधन नौ जून को हो गया। ओखलकांडा ब्लॉक के गौनियारौ में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से लौटते समय सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। कुमाऊं के लोककलाकार, रंगकर्मी, संस्कृति प्रेमी उनके निधन के सदमे से उबरे भी नहीं थे कि 15 जून को मशहूर कुमाऊंनी लोकगायिका नईमा खान उप्रेती का बीमारी से निधन हो गया। नईमा को गुजरे एक महीना भी नहीं हुआ कि शनिवार को काल के क्रूर हाथों में कुमाऊं की पारंपरिक लोकगायिका कबूतरी देवी को हमसे छीन लिया। इन सभी कलाकारों के निधन से लोककला की भरपाई कठिन है।
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कबूतरी देवी को लोककलाकारों की श्रद्धांजलि
हल्द्वानी। प्रसिद्ध लोकगायिका स्वर कोकिला कबूतरी देवी के निधन से रंगकर्मी, लोक कलाकार, लोकगायक, संस्कृति प्रेमियों में मायूसी है। सभी ने कबूतरी को पारंपरिक लोकगायकी की सुर साम्राज्ञी बता उनके निधन पर शोक जताया।
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दो दशक पहले दोबारा खोजा था कबूतरी को
आकाशवाणी, दूरदर्शन से आम जनमानस के बीच दशकों पहले छा जाने वाली लोकगायिका कबूतरी देवी पति के निधन के बाद निष्क्रिय हो गईं थीं। दो दशक पहले उन्हें खोजने का काम किया और नरेंद्र सिंह नेगी के साथ उन्होंने कई मंचों पर प्रस्तुति दी। मोहन उप्रेती लोककला विकास एवं विज्ञान शोध समिति अल्मोड़ा समेत प्रो. शेखर पाठक, उमा भट्ट ने नैनीताल बुलाकर उन्हें सम्मानित किया।
- हेमंत जोशी, मोहन उप्रेती लोककला विकास एवं विज्ञान शोध समिति अल्मोड़ा।

मंझी हुई कलाकार थीं कबूतरी
कबूतरी देवी पुराने जमाने की मंझी हुई कलाकार थीं। आकाशवाणी लखनऊ, दिल्ली, नजीबाबाद ने भी उन्हें सम्मानित किया था। उनकी गायकी में गजब का जादू था। इनके रिश्तेदार पवनदीप ने भी इन्हीं की प्रेरणा से गायन सीखा। उनके निधन से उत्तराखंड के लोकगायन को बड़ी क्षति हुई है।
- नैन नाथ रावल, लोकगायक।

स्वयं एक संस्थान थीं वह
उत्तराखंड संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट का कहना है कि कबूतरी देवी स्वयं में एक संस्थान थीं। 2010 में कुंभ मेले का शुभारंभ उनके लोकगीत से कराया था। ऋतुरैण की महान गायिका थीं।
- बीना भट्ट, निदेशक संस्कृति विभाग।

रेडियो में आकाशवाणी लखनऊ, नजीबाबाद से उनके पुराने लोकगीत सुनते थे। काफी अच्छी आवाज थी। हम उनसे जूनियर थे। उनकी आवाज प्रभावित करती थीं। वह कुमाऊं में लोकगीत के लिए बचपन से काम कर रहीं थीं।
- नरेंद्र सिंह नेगी, लोकगायक।
- कई कार्यक्रमों में कबूतरी जी से मिलना हुआ। कबूतरी जी पहाड़ पहली महिला हैं जो गायकी के क्षेत्र में अग्रणी रहीं। उनकी लोक की लयात्मकता अद्वितीय थी। उनका निधन उत्तराखंड लोक गायकी के अपूर्णनीय क्षति है। - हीरा सिंह राणा, लोकगायक

- उनको देखना, उनके साथ खड़े होना ही हमारे लिए गर्व की बात थी। उनका आत्मविश्वास देखने लायक था। वह उत्तराखंडी लोकगायकी की मुखिया थीं।
- हेमंत पांडे, सिने अभिनेता

दुर्भाग्य रहा कि मैं उनसे मिल नहीं पाई। कुछ दिन पहले उसने फोन पर बात कर उनके गीत पहाड़ों ठंडो पाणी, सुण कति मीठी वाणी गाने की अनुमति मांगी थी, जिसकी उन्होंने अनुमति दे दी थी।
- माया उपाध्याय, लोकगायिका

कबूतरी देवी कुमाऊंनी लोकगायकों में पहली महिला थीं और उन्हें लोकगायकी में महारत हासिल थी। पहाड़ के सौंदर्य से जुड़े ऋतुरैंण गायन में उनका कोई सानी नहीं था।
- प्रह्लाद सिंह मेहरा, लोकगायक
आकाशवाणी, दूरदर्शन, यूनीवर्सिटी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऋतुरैंण, चैतोल न्यौली गायन करतीं थीं। उनके निधन से एक युग का समापन हो गया।
- रितेश जोशी, अध्यक्ष मल्लिका लोककला समिति।

आकाशवाणी लखनऊ में एक बार 1980 में कबूतरी देवी से मुलाकात हुई थी। रेडियो में उनके गाने काफी सुने थे। वह महान लोकगायिका थीं।
- गंभीर दार्मिज, लोकगायक।

कुमाऊंनी संगीत की दुनिया में पहली महिला लोकगायिका थीं। वह अनूठी आवाज की धनी थीं। उनके पति जिन्हें नेताजी कहते थे, वह उन्हें गायकी के लिए प्रेरित करते थे। द्वाराहाट में बिखौती मेले में उनके साथ एक मंच पर गाने का अवसर मिला था।

- सुरेश प्रसाद सुरीला, लोकगायक।

कबूतरी देवी कुमाऊंनी लोकगीतों को आगे बढ़ाने का काम कर रही थीं। पारंपरिक लोकगायन में उनके जैसा गायक नहीं देखा।
- नरेंद्र सिंह टोलिया, निदेशक चांदनी इंटरटेनमेंट।
कई मंचों में कबूतरी देवी को सुना। उनके जैसा पारंपरिक लोकगायक नहीं देखा। उनके निधन से लोककला को अपूर्णनीय क्षति हुई है।
- जितेंद्र मर्तोलिया, निदेशक एटीएस मार्ट चैनल।

कबूतरी देवी के निधन पर शोक जताया
हल्द्वानी। देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल ने प्रसिद्ध लोकगायिका कबूतरी देवी के निधन पर शोक जताया है। इनमें देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल फिल्म प्रकोष्ठ के संयोजक विक्की योगी, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर, सह संयोजक फिल्म उद्योग प्रकोष्ठ जीएस रावत, नगर अध्यक्ष कमल मेहरा, जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट, मानव विकास सेवा संस्थान के सचिव किरन भट्ट, लोक कलाकार पवन कार्की, राकेश खनवाल, महेश चंद्र, प्रकाश, कवि दयाल, शिखा सिंह, श्वेता नगरकोटी, स्नेहा गोयल, प्रिया भटनागर, निहारिका टम्टा, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन सिंह कार्की आदि हैं।
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