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कहां जाएगा गौला का पानी
Updated Sat, 24 Mar 2018 02:28 AM IST
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हल्द्वानी। अमृत योजना के तहत शहर की पेयजल योजना का पुनर्गठन किया जा रहा है। पुनर्गठन का काम जलनिगम को दिया गया है। इसके तहत शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था जोनवार की जानी है। जलनिगम ने पुनर्गठन के तहत शहर को 18 जोन में बांटा है। नई लाइनों को पेयजल नलकूपों के ओवरहेड टैंकों से जोड़ा जा रहा है। इसमें गौला से जलसंस्थान को मिल रहे पानी का किस तरह उपयोग किया जाएगा, इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में पुनर्गठन के बाद भी शहर की पेयजल समस्या का समाधान हो पाएगा, असंभव प्रतीत होता है।
करीब 50 साल पुरानी शहर की पेयजल योजना गौला नदी के अलावा नलकूपों पर आधारित है। गौला से 35 एमएलडी पानी जलसंस्थान को मिलता है जबकि नलकूपों से करीब 20 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर की पेयजल योजना का पुनर्गठन अमृत योजना के तहत किया जा रहा है। योजना के लिए जलनिगम को 25.50 करोड़ रुपये स्वीकृत भी किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर की पेयजल योजना के पुनर्गठन के प्रस्ताव में गौला नदी से मिल रहे पानी को कैसे उपयोग में लाया जाएगा, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं है। जलनिगम ने जो डिजाइन तैयार किया है, उसके तहत शहर में बिछाई जा रही सभी पेयजल लाइनों को पेयजल ओवरहेड टैंकों से जोड़ा जा रहा है। मौजूदा समय में शीशमहल, सुभाषनगर, जगदंबा विहार, जलसंस्थान परिसर के नलकूप गौला नदी के पानी से भी जुड़े हैं। किसी भी नलकूप से गौला के पानी की सप्लाई नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी भी नलकूप के खराब होने पर संबंधित इलाके की पेयजल आपूर्ति चरमरा जाएगी। जलनिगम के ईई पीसी लोहुमी कहते हैं कि सभी नलकूप गौला नदी के पानी से जुड़े हैं जबकि जलसंस्थान के ईई संतोष कुमार उपाध्याय कहते हैं कि अधिकतर नलकूप गौला से मिल रहे पानी से नहीं जुड़े हैं। दोनों विभागीय अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि शहर के पेयजल योजना के पुनर्गठन प्रस्ताव में गौला के पानी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में पुनर्गठन पेयजल योजना से भी शहरवासियों को खास लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है।
पुनर्गठन योजना में गौला से आने वाले पानी को कनेक्शनों से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं
पुनर्गठन योजना से भी संभव नहीं पेयजल समस्या का समाधान
नई लाइनें ओवरहेड टैंकों से जोड़ी जा रहीं
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करीब 50 साल पुरानी शहर की पेयजल योजना गौला नदी के अलावा नलकूपों पर आधारित है। गौला से 35 एमएलडी पानी जलसंस्थान को मिलता है जबकि नलकूपों से करीब 20 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर की पेयजल योजना का पुनर्गठन अमृत योजना के तहत किया जा रहा है। योजना के लिए जलनिगम को 25.50 करोड़ रुपये स्वीकृत भी किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर की पेयजल योजना के पुनर्गठन के प्रस्ताव में गौला नदी से मिल रहे पानी को कैसे उपयोग में लाया जाएगा, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं है। जलनिगम ने जो डिजाइन तैयार किया है, उसके तहत शहर में बिछाई जा रही सभी पेयजल लाइनों को पेयजल ओवरहेड टैंकों से जोड़ा जा रहा है। मौजूदा समय में शीशमहल, सुभाषनगर, जगदंबा विहार, जलसंस्थान परिसर के नलकूप गौला नदी के पानी से भी जुड़े हैं। किसी भी नलकूप से गौला के पानी की सप्लाई नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी भी नलकूप के खराब होने पर संबंधित इलाके की पेयजल आपूर्ति चरमरा जाएगी। जलनिगम के ईई पीसी लोहुमी कहते हैं कि सभी नलकूप गौला नदी के पानी से जुड़े हैं जबकि जलसंस्थान के ईई संतोष कुमार उपाध्याय कहते हैं कि अधिकतर नलकूप गौला से मिल रहे पानी से नहीं जुड़े हैं। दोनों विभागीय अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि शहर के पेयजल योजना के पुनर्गठन प्रस्ताव में गौला के पानी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में पुनर्गठन पेयजल योजना से भी शहरवासियों को खास लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है।
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पुनर्गठन योजना में गौला से आने वाले पानी को कनेक्शनों से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं
पुनर्गठन योजना से भी संभव नहीं पेयजल समस्या का समाधान
नई लाइनें ओवरहेड टैंकों से जोड़ी जा रहीं