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स्कूलों में पढ़ाई जाए कुमाऊंनी, गढ़वाल भाषा
Updated Sat, 20 Oct 2018 01:09 AM IST
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पहाड़ के संपादक डॉ. शेखर पाठक
- फोटो : अमर उजाला
रामनगर (नैनीताल)। नगर पालिका के ऑडिटोरियम में त्रिदिवसीय कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषाई सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन स्कूलों में कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषा पढ़ाने की पैरवी की गई जबकि शनिवार को कवि सम्मेलन के साथ समापन होगा।
यहां पहली बार आयोजित किए जा रहे कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषाई सम्मेलन में कई ख्यातिप्राप्त वक्ता आ रहे हैं। वह विभिन्न माध्यमों से भाषाओं के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दे रहे हैं लेकिन दशहरा, दिवाली की व्यस्तता के कारण सहृदय श्रोता, दर्शक कम आ रहे हैं। इस पर इतिहासकार शेखर पाठक ने भी चिंता जताई। उन्होंने हर स्तर पर कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषा के पाठ्यक्रम को लागू करने की जरूरत बताई। उत्तराखंड भाषा संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. नागेंद्र ध्यानी ने कहा कि संस्कार से स्थानीय भाषाओं की मजबूती होती है। कुमाऊं की पहली लोकगायिका कबूतरी देवी के जीवन और गायकी की पड़ताल करती दस्तावेजी फिल्म भी दिखाई गई। इसका नाम अपनी धुन में कबूतरी देवी था। शनिवार को कुमाऊंनी-गढ़वाली कवि सम्मेलन होगा। इस दौरान भोर सोसायटी के संजय रिखाड़ी, अजेंद्र सुंदरियाल, नवेंदु मठपाल, नंदराम आर्य, नवीन तिवारी, हिमानी थापा, कनिका ध्यानी आदि रहे।
कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषाई सम्मेलन का दूसरा दिन
आज कवि सम्मेलन के साथ समापन होगा
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यहां पहली बार आयोजित किए जा रहे कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषाई सम्मेलन में कई ख्यातिप्राप्त वक्ता आ रहे हैं। वह विभिन्न माध्यमों से भाषाओं के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दे रहे हैं लेकिन दशहरा, दिवाली की व्यस्तता के कारण सहृदय श्रोता, दर्शक कम आ रहे हैं। इस पर इतिहासकार शेखर पाठक ने भी चिंता जताई। उन्होंने हर स्तर पर कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषा के पाठ्यक्रम को लागू करने की जरूरत बताई। उत्तराखंड भाषा संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. नागेंद्र ध्यानी ने कहा कि संस्कार से स्थानीय भाषाओं की मजबूती होती है। कुमाऊं की पहली लोकगायिका कबूतरी देवी के जीवन और गायकी की पड़ताल करती दस्तावेजी फिल्म भी दिखाई गई। इसका नाम अपनी धुन में कबूतरी देवी था। शनिवार को कुमाऊंनी-गढ़वाली कवि सम्मेलन होगा। इस दौरान भोर सोसायटी के संजय रिखाड़ी, अजेंद्र सुंदरियाल, नवेंदु मठपाल, नंदराम आर्य, नवीन तिवारी, हिमानी थापा, कनिका ध्यानी आदि रहे।
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कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषाई सम्मेलन का दूसरा दिन
आज कवि सम्मेलन के साथ समापन होगा