{"_id":"59ab1a704f1c1b56738b4eb2","slug":"131504385648-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामभरोसे 16 डिग्री कालेज, न भूमि है और न भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामभरोसे 16 डिग्री कालेज, न भूमि है और न भवन
Updated Sun, 03 Sep 2017 02:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। राज्य में राजकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी गई, लेकिन इनमें बेहतर पठन-पाठन के साधन मुहैया कराने की ओर सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। प्रदेश के 16 डिग्री कॉलेजों के पास अब तक न तो भवन ही है और न ही जमीन। कई नवसृजित राजकीय डिग्री कॉलेज अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं।
राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल 34 राजकीय डिग्री कॉलेज थे। 2014 तक राजकीय डिग्री कॉलेजों की यह संख्या 70 तक पहुंच गई। राजनीतिक दबावों के चलते सत्र 2014-15 से 2016-17 सत्र तक 30 डिग्री कॉलेज और खोल दिए गए। इससे यह संख्या शतक पर पहुंच गई। सूत्रों की मानें तो दो वर्षों में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में सीएम की घोषणा पर 24 नए डिग्री कॉलेज खोलने की शासन ने मंजूरी दी। इन डिग्री कॉलेजों का संचालन भी शुरू कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में अभी 16 ऐसे डिग्री कॉलेज हैं जो कि सरकारी या फिर दूसरे भवनों में चल रहे हैं, इन कॉलेजों के लिए अभी तक न भूमि है और न भवन।
इन डिग्री कॉलेजों के पास न भूमि, न भवन
गरुड़, लमगड़ा, ब्रह्मखाल (डुण्डा), तल्लासल्ट, घाट, पोखरी पट्टी क्वीली, उफरैखाल, मांसी, दल्लावाला, भतरौंजखान, पोखड़ा, पावकी देवी, शीतलाखेत, नंदासैंण, कमांद और मालधनचौड़ राजकीय महाविद्यालय।
विज्ञापन
प्राचार्य विहीन हैं 13 डिग्री कॉलेज
हल्द्वानी। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अभी भी प्रदेश के 13 डिग्री कालेजों में प्राचार्य नहीं हैं। 100 डिग्री कालेजों में से केवल 87 में प्राचार्य तैनात हैं। इससे भी डिग्री कालेजों की समस्याएं बनी हुई हैं।
- राजकीय डिग्री कालेजों में बेहतर पढ़ाई हो सके, इसके लिए शासन गंभीर हैं। करीब 22 डिग्री कालेजों में निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें से छह कॉलेजों का निर्माण लगभग पूरा होने की स्थिति में है। जिन कॉलेजों के पास भूमि नहीं हैं वहां भूमि तलाशने का कार्य चल रहा है। इस कार्य में उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत स्वयं रुचि ले रहे हैं कि कोई भी महाविद्यालय भूमि और भवन के बिना न रहे। साथ ही सभी डिग्री कालेजों में प्राचार्यों की तैनाती हो जाए, इसके भी कोशिश की जा रही है। - डा. बीसी मेलकानी, उच्चशिक्षा निदेशक
विज्ञापन
राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल 34 राजकीय डिग्री कॉलेज थे। 2014 तक राजकीय डिग्री कॉलेजों की यह संख्या 70 तक पहुंच गई। राजनीतिक दबावों के चलते सत्र 2014-15 से 2016-17 सत्र तक 30 डिग्री कॉलेज और खोल दिए गए। इससे यह संख्या शतक पर पहुंच गई। सूत्रों की मानें तो दो वर्षों में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में सीएम की घोषणा पर 24 नए डिग्री कॉलेज खोलने की शासन ने मंजूरी दी। इन डिग्री कॉलेजों का संचालन भी शुरू कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में अभी 16 ऐसे डिग्री कॉलेज हैं जो कि सरकारी या फिर दूसरे भवनों में चल रहे हैं, इन कॉलेजों के लिए अभी तक न भूमि है और न भवन।
विज्ञापन
इन डिग्री कॉलेजों के पास न भूमि, न भवन
गरुड़, लमगड़ा, ब्रह्मखाल (डुण्डा), तल्लासल्ट, घाट, पोखरी पट्टी क्वीली, उफरैखाल, मांसी, दल्लावाला, भतरौंजखान, पोखड़ा, पावकी देवी, शीतलाखेत, नंदासैंण, कमांद और मालधनचौड़ राजकीय महाविद्यालय।
विज्ञापन
प्राचार्य विहीन हैं 13 डिग्री कॉलेज
हल्द्वानी। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अभी भी प्रदेश के 13 डिग्री कालेजों में प्राचार्य नहीं हैं। 100 डिग्री कालेजों में से केवल 87 में प्राचार्य तैनात हैं। इससे भी डिग्री कालेजों की समस्याएं बनी हुई हैं।
- राजकीय डिग्री कालेजों में बेहतर पढ़ाई हो सके, इसके लिए शासन गंभीर हैं। करीब 22 डिग्री कालेजों में निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें से छह कॉलेजों का निर्माण लगभग पूरा होने की स्थिति में है। जिन कॉलेजों के पास भूमि नहीं हैं वहां भूमि तलाशने का कार्य चल रहा है। इस कार्य में उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत स्वयं रुचि ले रहे हैं कि कोई भी महाविद्यालय भूमि और भवन के बिना न रहे। साथ ही सभी डिग्री कालेजों में प्राचार्यों की तैनाती हो जाए, इसके भी कोशिश की जा रही है। - डा. बीसी मेलकानी, उच्चशिक्षा निदेशक