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प्रकृति के संरक्षण और संवर्द्धन का संदेश देंगे ‘इको चेक पोस्ट’
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:19 AM IST
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वन विभाग की नई चौकी
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। प्रकृति के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए जंगलात ने प्रकृति का ही सहारा लिया है। वन विभाग जंगलों के बीचों बीच ‘इको चेक पोस्ट बैरियर’ तैयार कर रहा है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के नानकमत्ता में प्रदेश का पहला इको चेक पोस्ट को मॉडल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। बाद में सूबे की अन्य वन प्रभागों में भी बनाई जाएंगी। इस चेक पोस्ट की खूबी यह होगी कि इनमें प्राकृतिक उत्पादों (वन) बांस, सौर ऊर्जा, सौर रोशनी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। यह चेक पोस्ट वन्य जीव अपराधियों पर अंकुश लगाने के मकसद से आधुनिक उपकरण सीसीटीवी आदि से भी लैस होगी।
चेक पोस्ट की ये हैं विशेषताएं
- इको चेक पोस्ट बांस की शीट से तैयार किया जा रहा है। जो कि कार्बन फुट प्रिंट कम करने में मददगार है।
- चेक पोस्ट में चारों तरफ शीशे की विंडो लगाई गई है ताकि सूर्य की अंतिम किरण तक रोशनी भरपूर रहेगी।
- सौर ऊर्जा से चलने वाले बल्ब, पंखे, इंवर्टर का उपयोग किया जा रहा है। सोलर स्ट्रीट लाइट भी लगाई जाएंगी।
- सीमेंट कंक्रीट का बेहद कम इस्तेमाल किया गया है।
- सीसीटीवी, कंप्यूटरों से होगी लैस, अपराधियों को निगाह रखने में मददगार
चार लाख है लागत
इको चेक पोस्ट आम चेक पोस्ट के मुकाबले कम लागत में तैयार हो रही है। एक इको चेक पोस्ट चार लाख रुपये में तैयार हो जा रही है जबकि आम चेक पोस्ट बनाने में 6-7 लाख रुपये का खर्च होता है। इस पोस्ट में एक शयन कक्ष, कार्यालय, शौचालय, किचन का भी इंतजाम है।
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डीएफओ दफ्तर के बाद गार्ड चौकी में भी मारी बाजी
डीएफओ दफ्तर में तराई पूर्वी वन प्रभाग का पहला कार्यालय है जिसे बनाने में बांस का इस्तेमाल किया गया। अब नानकमत्ता में यह चौकी बनने के बाद बांस से बनने वाली गार्ड चौकी का खिताब भी तराई पूर्वी के नाम दर्ज हो गया है।
नानकमत्ता में पहली इको चेक पोस्ट तैयार की है, इसमें प्राकृतिक उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया है। जल्द ही तैयार हो जाएगी। फिर सितारगंज में इस तरह की चौकी बनाई जाएगी।
- नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ, तराई पूर्वी वन प्रभाग
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तराई पूर्वी वन प्रभाग के नानकमत्ता में प्रदेश का पहला इको चेक पोस्ट को मॉडल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। बाद में सूबे की अन्य वन प्रभागों में भी बनाई जाएंगी। इस चेक पोस्ट की खूबी यह होगी कि इनमें प्राकृतिक उत्पादों (वन) बांस, सौर ऊर्जा, सौर रोशनी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। यह चेक पोस्ट वन्य जीव अपराधियों पर अंकुश लगाने के मकसद से आधुनिक उपकरण सीसीटीवी आदि से भी लैस होगी।
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चेक पोस्ट की ये हैं विशेषताएं
- इको चेक पोस्ट बांस की शीट से तैयार किया जा रहा है। जो कि कार्बन फुट प्रिंट कम करने में मददगार है।
- चेक पोस्ट में चारों तरफ शीशे की विंडो लगाई गई है ताकि सूर्य की अंतिम किरण तक रोशनी भरपूर रहेगी।
- सौर ऊर्जा से चलने वाले बल्ब, पंखे, इंवर्टर का उपयोग किया जा रहा है। सोलर स्ट्रीट लाइट भी लगाई जाएंगी।
- सीमेंट कंक्रीट का बेहद कम इस्तेमाल किया गया है।
- सीसीटीवी, कंप्यूटरों से होगी लैस, अपराधियों को निगाह रखने में मददगार
चार लाख है लागत
इको चेक पोस्ट आम चेक पोस्ट के मुकाबले कम लागत में तैयार हो रही है। एक इको चेक पोस्ट चार लाख रुपये में तैयार हो जा रही है जबकि आम चेक पोस्ट बनाने में 6-7 लाख रुपये का खर्च होता है। इस पोस्ट में एक शयन कक्ष, कार्यालय, शौचालय, किचन का भी इंतजाम है।
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डीएफओ दफ्तर के बाद गार्ड चौकी में भी मारी बाजी
डीएफओ दफ्तर में तराई पूर्वी वन प्रभाग का पहला कार्यालय है जिसे बनाने में बांस का इस्तेमाल किया गया। अब नानकमत्ता में यह चौकी बनने के बाद बांस से बनने वाली गार्ड चौकी का खिताब भी तराई पूर्वी के नाम दर्ज हो गया है।
नानकमत्ता में पहली इको चेक पोस्ट तैयार की है, इसमें प्राकृतिक उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया है। जल्द ही तैयार हो जाएगी। फिर सितारगंज में इस तरह की चौकी बनाई जाएगी।
- नीतिश मणि त्रिपाठी, डीएफओ, तराई पूर्वी वन प्रभाग