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नेगी के गीतों पर आधारित पुस्तक होगी प्रकाशित
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर
Updated Mon, 12 Sep 2016 10:57 PM IST
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गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रौढ़ सतत शिक्षा एवं प्रसार विभाग की ओर से लोक संस्कृति पर आधारित साहित्य निर्माण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला सोमवार को संपन्न हो गई। कार्यशाला में नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों पर आधारित जनसरोकार पुस्तक के संपादन के लिए साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों और लेखकों से विचार विमर्श किया गया। गढ़वाल विवि का प्रौढ़ शिक्षा विभाग इस पुस्तक का संपादन करेगा। विभाग का कहना है कि एक माह के भीतर पुस्तक प्रकाशित कर दी जाएगी।
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कार्यशाला के समापन दिवस पर प्रौढ़ शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस एस रावत ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों पर विभिन्न लेखकों के लेखों में गीतों की काव्य मीमांशा और गीतों में समाहित जनसरोकारों की जो व्याख्या की गई है वह अपने आप में अद्वितीय है।
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इन लेखों का एक बहुमूल्य शोध संदर्भ पुस्तक के रूप में प्रकाशित होना जन उपयोगी सिद्ध होगा। नेगी के गीतों पर आधारित इस पुस्तक का संपादन अपने आप में विश्वविद्यालय की एक अनूठी पहल है, जो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी के लिए उपयोगी होगा।
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यही नहीं यह पुस्तक पहाड़ के जनजीवन, भूगोल, आर्थिकी, पलायन की मनोदशा, रोजगार की विवशता, स्त्री विमर्श तथा पर्यावरणीय चिंतायें आदि अनेक ऐसे सामाजिक सरोकारों को लोक परिवेश में समझने और परखने में अति मददगार साबित होगी।
प्रो. रावत ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा अनेक लेखों और टिप्पणियों में आवश्यकतानुसार आवश्यक संशोधन किये गए हैं ताकि पुस्तक को समग्रता के साथ प्रस्तुत किया जा सके। विशेषज्ञों के दल में शामिल डा. नंद किशोर ने कहा कि पाठकों के समक्ष जब पुस्तक प्रकाशित होगी तो नेगी के गीतों को मात्र मनोरंजक दृष्टि से सुनने वालों को उनके विभिन्न पक्षों के अद्भुत आयाम भी पढ़ने और महसूस करने को मिलेंगे।
तीन दिवसीय इस कार्यशाला में साहित्यकार व संस्कृति कर्मी प्रो. डीआर पुरोहित, शैलेंद्र तिवारी, बेला पुरोहित, मुकेश सेमवाल, डा. मोहन पंवार, प्रो. आरसी डिमरी, देवेंद्र उनियाल, डा. रीना आर्य आदि उपस्थित रहे।