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डीएनए टेस्ट के बाद मंदबुद्धि युवती से दुराचार का आरोपी दोषमुक्त करार
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:54 PM IST
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कोटद्वार। लैंसडौन तहसील के पट्टी पटवारी मल्ला ढांगू-तीन के एक गांव में पिछले वर्ष दर्ज मंदबुद्धि युवती से दुराचार के मामले में डीएनए टेस्ट और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में एडीजे कोर्ट कोटद्वार ने आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बताते हुए आरोपी युवक के पिता और परिजनों ने राहत की सांस ली है। कहा कि उनके बेटे को झूठा फंसाया गया था। डीएनए टेस्ट के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता जयशंकर ढौंडियाल ने बताया कि 28 फरवरी, 2016 को एक मंदबुद्धि युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए उसके परिजनों ने लैंसडौन तहसील के मल्ला ढांगू पट्टी निवासी भक्तिभूषण पुत्र विक्रमादित्य के खिलाफ राजस्व पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। राजस्व पुलिस के बाद यह मामला जांच के लिए सिविल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पंडिताई करने वाला भक्तिभूषण गिरफ्तारी के बाद से ही अपने को निर्दोष बता रहा था। इस बीच दुराचार की पीड़िता युवती ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के बाद बचाव पक्ष की ओर से एडीजे कोर्ट में आरोपी युवक, बच्ची और उसकी मां का डीएनए टेस्ट करवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। कोर्ट के आदेश पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून में हुए डीएनए टेस्ट में पीड़िता को बच्ची की जैविक माता बताया गया है, लेकिन आरोपी युवक के जैविक पिता होने से इनकार कर दिया गया। डीएनए की रिपोर्ट और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपी युवक भक्तिभूषण को दोषमुक्त करार दिया।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता जयशंकर ढौंडियाल ने बताया कि 28 फरवरी, 2016 को एक मंदबुद्धि युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए उसके परिजनों ने लैंसडौन तहसील के मल्ला ढांगू पट्टी निवासी भक्तिभूषण पुत्र विक्रमादित्य के खिलाफ राजस्व पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। राजस्व पुलिस के बाद यह मामला जांच के लिए सिविल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पंडिताई करने वाला भक्तिभूषण गिरफ्तारी के बाद से ही अपने को निर्दोष बता रहा था। इस बीच दुराचार की पीड़िता युवती ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के बाद बचाव पक्ष की ओर से एडीजे कोर्ट में आरोपी युवक, बच्ची और उसकी मां का डीएनए टेस्ट करवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। कोर्ट के आदेश पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून में हुए डीएनए टेस्ट में पीड़िता को बच्ची की जैविक माता बताया गया है, लेकिन आरोपी युवक के जैविक पिता होने से इनकार कर दिया गया। डीएनए की रिपोर्ट और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपी युवक भक्तिभूषण को दोषमुक्त करार दिया।
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