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बीस दिन और खूंटियों और पेड़ों पर लटकी रहेंगी अस्थियां
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गंगा में अस्थियां प्रवाहित करने की लालसा में सैकड़ों देशवासियों ने इन दिनों मृत हुए अपने परिजनों की अस्थियां खूंटियों पर लटका रखी हैं । कुछ श्रद्धालुओं ने अस्थि बंधी पोटलियां पेड़ों से बांध रखी हैं। अब लॉकडाउन की अवधि 3 मई तक बढ़ा दिए जाने के बाद प्रवाह के लिए अभी बीस दिन और प्रतीक्षा करनी पड़ी थी।
अस्थि प्रवाह और पितृ कर्मकांड करने के लिए कई राज्यों से करीब 5 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन हरिद्वार पहुंचते थे। 24 मार्च से देशभर में लॉकडाउन लागू होने के बाद हरिद्वार में हरकी पैड़ी और कर्मकांड के तमाम घाट खाली पड़े हैं। न तो कोई यात्री पहुंच रहा है और न ही किसी घाट पर किसी पुरोहित को जाने दिया जा रहा है। अब इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाने पर प्राचीनकाल से चली आ रही परंपराओं को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है।
अब ऐसे श्रद्धालु हरिद्वार में रहने वाले अपने तीर्थ पुरोहित से फोन पर सलाह ले रहे हैं। पुरोहित उन्हें खूंटी या पेड़ पर अस्थियां लटकाने की सलाह दे रहे हैं। ये यात्री अपने शहरों में तेरह दिनों में होने वाले दशगात्र, क्रिया, सपिंडी, नारायणी भी नहीं करा पा रहे। यह कार्य कराने से शहरों और गांवों के पंडित भी कोरोना के डर से मना कर रहे हैं।
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ये कर्मकांड भी अब लॉकडाउन हटने पर हरिद्वार में किए जाएंगे। यह समस्या पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू, हिमाचल, मध्यप्रदेश और यूपी के यात्रियों के सामने अधिक आ रही है।
गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ के अनुसार यह बड़ी विकट समस्या है कि यात्री पितृ कार्यों के लिए भी ब्रह्मकुंड, कुशावर्त, नारायणी शिला, सती घाट आदि नहीं आ पा रहे। मजबूरी में अस्थियां लटकानी पड़ रही हैं।
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अस्थि प्रवाह और पितृ कर्मकांड करने के लिए कई राज्यों से करीब 5 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन हरिद्वार पहुंचते थे। 24 मार्च से देशभर में लॉकडाउन लागू होने के बाद हरिद्वार में हरकी पैड़ी और कर्मकांड के तमाम घाट खाली पड़े हैं। न तो कोई यात्री पहुंच रहा है और न ही किसी घाट पर किसी पुरोहित को जाने दिया जा रहा है। अब इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाने पर प्राचीनकाल से चली आ रही परंपराओं को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है।
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अब ऐसे श्रद्धालु हरिद्वार में रहने वाले अपने तीर्थ पुरोहित से फोन पर सलाह ले रहे हैं। पुरोहित उन्हें खूंटी या पेड़ पर अस्थियां लटकाने की सलाह दे रहे हैं। ये यात्री अपने शहरों में तेरह दिनों में होने वाले दशगात्र, क्रिया, सपिंडी, नारायणी भी नहीं करा पा रहे। यह कार्य कराने से शहरों और गांवों के पंडित भी कोरोना के डर से मना कर रहे हैं।
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ये कर्मकांड भी अब लॉकडाउन हटने पर हरिद्वार में किए जाएंगे। यह समस्या पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू, हिमाचल, मध्यप्रदेश और यूपी के यात्रियों के सामने अधिक आ रही है।
गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ के अनुसार यह बड़ी विकट समस्या है कि यात्री पितृ कार्यों के लिए भी ब्रह्मकुंड, कुशावर्त, नारायणी शिला, सती घाट आदि नहीं आ पा रहे। मजबूरी में अस्थियां लटकानी पड़ रही हैं।