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सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार वालों की होगी विशेष जांच
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हरिद्वार। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए स्वास्थ्य महकमा गंभीर नजर आ रहा है। जिला अस्पताल के परिसर में होम्योपैथी अस्पताल को फ्लू क्लीनिक बनाया गया है। इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार से पीड़ित व्यक्ति की जांच की जाएगी। इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती वार्ड में बाहर के लोगों के साथ मरीज के तीमारजनों के लिए भी प्रवेश बंद करा दिया है।
जिला अस्पताल हरिद्वार में कोरोना के प्रति भले कोई इंतजाम नहीं है, लेकिन जितनी भी सुविधाएं हैं उनसे बेहतर काम करने का प्रयास जारी है। समस्त स्टाफ के अवकाश निरस्त कर दिए हैं। अस्पताल में सभी मर्ज के मरीजों को एक साथ बैठने या देखने की व्यवस्था होने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इसके लिए अस्पताल के बाहर परिसर में होम्योपैथी अस्पताल को फ्लू क्लीनिक बनाया गया है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार से पीड़ितों को देखा जाएगा ताकि इन मर्ज के लोग अन्य मरीजों या स्टाफ के संपर्क में न आए। जांच करने वाले स्टाफ को विशेष सावधानी बरतने के लिए निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को अस्पताल में वार्डों में आमजन के साथ तीमारजनों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
ऋषिकुल आयुर्वेद अस्पताल में बनाया आईसोलेशन वार्ड
ऋषिकुल आयुर्वेद के अस्पताल में दस बेड का आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराते हुए स्टाफ नियुक्त कर दिया है। निदेशक प्रो. अनूप गक्खड़ ने बताया कि अस्पताल में सभी स्टाफ को सावधानी बरतने के साथ मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध करा दिया गया है। ओपीडी करते समय मरीजों में लक्षण पाए जाने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाएगा। बताया, एक व्यक्ति को संदिग्ध पाए जाने पर जिला अस्पताल भेजा था, लेकिन उसे साधारण तौर पर जुकाम था।
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महिला अस्पताल में जारी की गाइड लाइन
महिला अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं के साथ जच्चा बच्चा के लिए विशेष तौर पर गाइड लाइन जारी करते हुए भीड़ एकत्रित न होने देने को परामर्श जारी किया है। सीएमएस डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि जांच को आ रही गर्भवती महिलाओं के साथ केवल एक तीमारजन आने को परामर्श दिया है। साथ ही जच्चा बच्चा के साथ भी मात्र एक ही तीमारजन रहने को निर्देश दिए हैं।
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जिला अस्पताल हरिद्वार में कोरोना के प्रति भले कोई इंतजाम नहीं है, लेकिन जितनी भी सुविधाएं हैं उनसे बेहतर काम करने का प्रयास जारी है। समस्त स्टाफ के अवकाश निरस्त कर दिए हैं। अस्पताल में सभी मर्ज के मरीजों को एक साथ बैठने या देखने की व्यवस्था होने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इसके लिए अस्पताल के बाहर परिसर में होम्योपैथी अस्पताल को फ्लू क्लीनिक बनाया गया है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि इसमें सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार से पीड़ितों को देखा जाएगा ताकि इन मर्ज के लोग अन्य मरीजों या स्टाफ के संपर्क में न आए। जांच करने वाले स्टाफ को विशेष सावधानी बरतने के लिए निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को अस्पताल में वार्डों में आमजन के साथ तीमारजनों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
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ऋषिकुल आयुर्वेद अस्पताल में बनाया आईसोलेशन वार्ड
ऋषिकुल आयुर्वेद के अस्पताल में दस बेड का आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराते हुए स्टाफ नियुक्त कर दिया है। निदेशक प्रो. अनूप गक्खड़ ने बताया कि अस्पताल में सभी स्टाफ को सावधानी बरतने के साथ मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध करा दिया गया है। ओपीडी करते समय मरीजों में लक्षण पाए जाने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाएगा। बताया, एक व्यक्ति को संदिग्ध पाए जाने पर जिला अस्पताल भेजा था, लेकिन उसे साधारण तौर पर जुकाम था।
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महिला अस्पताल में जारी की गाइड लाइन
महिला अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं के साथ जच्चा बच्चा के लिए विशेष तौर पर गाइड लाइन जारी करते हुए भीड़ एकत्रित न होने देने को परामर्श जारी किया है। सीएमएस डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि जांच को आ रही गर्भवती महिलाओं के साथ केवल एक तीमारजन आने को परामर्श दिया है। साथ ही जच्चा बच्चा के साथ भी मात्र एक ही तीमारजन रहने को निर्देश दिए हैं।