करोड़ों की भूमि पर मंदिर की आड़ में कब्जे का आरोप, मुकदमा दर्ज

Dehradun Bureau Updated Thu, 17 May 2018 11:48 PM IST
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हरिद्वार।
शहर के बीचोंबीच बेशकीमती जमीन एक बार फिर से सुर्खियों में है। जमीन पर स्वामित्व का दावा कर रहे दिल्ली के एक व्यक्ति ने नया हरिद्वार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामबाबू बंसल पर भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली ज्वालापुर में मुकदमा दर्ज? कराया है।
नया हरिद्वार कालोनी में करोड़ों की करीब दस बीघा भूमि पर अर्से से विवाद चला आ रहा है। एक तरफ से नया हरिद्वार वेलफेयर एसोसिएशन पक्षकार है तो दूसरे पक्ष की ओर से कालोनाइजर रहे दिवंगत महेंद्र सिंह के रिश्तेदार। बृहस्पतिवार को प्रकरण में उस समय नया मोड़ आया जब दिल्ली के रानीखेड़ा के रहने वाले स्वरूप सिंह ने कोतवाली ज्वालापुर में मुकदमा दर्ज कराया कि नया हरिद्वार कालोनी निवासी रामबाबू बंसल पुत्र रामस्वरूप उनकी भूमि पर बने मंदिर की आड़ में कब्जा करना कर रहा है और मंदिर के नाम पर एक कमेटी बनाई हुई है। आरोप है कि तथाकथित मंदिर समिति के अध्यक्ष और सदस्य उनकी संपत्ति पर कब्जा करने में जुटे हैं। आरोप है कि विरोध करने पर गाली गलौच करते हुए मारपीट की और हत्या की धमकी भी दी गई। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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ये भी कब्जेदार
हरिद्वार। बेशकीमती भूमि पर मंदिर बना हुआ है तो दूसरी तरफ एक बड़े हिस्से पर जल निगम का कब्जा है। वर्ष 2009 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत यहां पानी की टंकी बनी थी और जल निगम इस भूमि पर काबिज है। एक क्षेत्रीय पार्षद रहे भाजपा नेता अनिल अरोड़ा ने विरोध किया था लेकिन पूर्व पालिकाध्यक्ष कमल जौहरा ने अनुमति दे दी थी। होर्डिंग के धंधे से जुड़े दो भाजपा नेता अवैध रूप से इस भूमि का इस्तेमाल कर रहे हैं तो एक मार्बल कारोबारी ने भी भूमि को गोदाम बना रखा है। आबकारी महकमा ने भी इस भूमि के एक हिस्से को मुकदमों से जुड़े चौपहिया और दुपहिया वाहन पार्क करने का स्थान बनाया हुआ है। एक होटल की इस भूमि पर पार्किंग भी बनी है। --------------------
भूमि की कहानी भाजपा नेता की जुबानी
हरिद्वार। भाजपा नेता अनिल अरोड़ा की मानें तो नया हरिद्वार एवं गोविंदपुरी कालोनी में प्लाटिंग दिल्ली की बड़ी कंपनी डीएलएफ के मालिक रहे चौधरी महेंद्र सिंह ने की थी। तब उत्तर प्रदेश नगर नियोजन विभाग से नक्शा पास कराया गया था। तब इस भूमि को स्कूल और पार्क के इस्तेमाल के लिए छोड़ा गया था। बाद में कालोनाइजर के परिजन ने इस भूमि पर अपना हक जताया था। उनकी माने तो मौजूदा समय में जिला जज ने इस भूमि को लेकर एक आदेश दिया है जिसके खिलाफ नया हरिद्वार वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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इनके खिलाफ क्यों नहीं हुआ मुकदमा
हरिद्वार। यदि भूमि का स्वामित्व स्वरूप सिंह का है तो ऐसे में जल निगम, भूमि का इस्तेमाल कर रहे दो भाजपाइयों, मार्बल कारोबारी, आबकारी विभाग के खिलाफ भी केस दर्ज होना चाहिए क्योंकि उनका भी भूमि पर कब्जा है। भूमि पर बना मंदिर निजी नहीं है, वह सार्वजनिक है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर षड्यंत्र की बू आ रही है। चर्चा तो ये है कि सत्ताधारी दल के रसूखदार नेता बेशकीमती भूमि को खेल पर्दे के पीछे से खेल रहे हैं। एक चर्चा यह भी है कि आरोपी बताए गए रामबाबू बंसल ही भूमि से जुड़े मुकदमे की पैरवी करते है।

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