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बाबा की अनुसंधानशाला में 600 विशेषज्ञों ने शुरू किया कार्य

अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Fri, 19 May 2017 10:55 PM IST
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योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ स्थित देश की पहली अनुसंधानशाला में 600 विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीम ने अनुसंधान कार्य शुरू कर दिया है। अनुसंधान चार क्षेत्रों में शुरू किया गया है। अनुसंधानशाला का बॉटेनिकल गार्डन भी पहली बार देश से आए विशेषज्ञों के लिए खोला गया। इस गार्डन में जड़ी-बूटियों के साथ-साथ विश्वभर के औषधीय पौधे उगाए गए हैं। अनुसंधान के निष्कर्ष आने वाले समय में विश्व के काम आएंगे।    
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हाल ही में प्रधानमंत्री ने इस अनुसंधानशाला का उद्घाटन किया था। इस में देश-विदेश से आए 600 विशेषज्ञों की टीम चार क्षेत्रों में अनुसंधान में जुट गई है। करीब 50 विशेषज्ञ इस कार्य की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि दुनिया में जितने भी बॉटेनिकल प्लांट एवं जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं उन सभी के औषधीय गुणों को प्रमाणिक करने का काम इस केंद्र में शुरू हुआ है। इससे यह पता लगेगा कि किस जड़ी-बूटी का कौन सा भाग किस बीमारी के काम आता है। अनुसंधान की आखिरी हद तक जाकर प्रमाणीकरण किया जाएगा। इस कार्य को केंद्र सरकार के साथ-साथ विश्व के अनेक शीर्षस्थ केंद्रों पर परीक्षण को भेजा जाएगा। प्रमाणीकरण होते ही औषधीय पौधों को अंतिम निष्कर्ष विश्वभर को भेज दिए जाएंगे और सभी दवाएं प्रमाणिक हो जाएंगी। दूसरे केंद्र में क्लीनिकल अनुसंधान का काम शुरू हुआ है। इस केंद्र में दवाओं के प्रयोग कई प्रकार से किए जा रहे हैं। कुछ प्रयोग पशुओं पर भी किए जाएंगे। विश्व में प्रचलित अंग्रेजी दवाओं के समानांतर आयुर्वेदिक दवाओं को खड़ा करने के बाद अंग्रेजी दवाओं का महंगा बाजार पिछड़ जाएगा। तीसरे केंद्र में कई रसायनों और द्रवों के परीक्षण का बेहद गहन कार्य चल रहा है।      


आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि चौथा केंद्र और भी अधिक महत्वपूर्ण है। इस केंद्र में दुनिया भर की पांडुलिपियों और उपलब्ध प्राचीन दस्तावेजों के प्रमाणीकरण का काम शुरू हुआ है। इस कार्य में विदेशी वैैज्ञानिक भी खासी संख्या में जुटे हैं। यह केंद्र धर्म ग्रंथों के दुर्लभ गुणों को बाहर लाकर उन्हें प्रमाणित करेगा। यज्ञ का ब्रह्मांड पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह भी खोजा जा रहा है। उन्होंने बताया यह अनुसंधान केंद्र अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा। इस केंद्र में वर्षभर पूरे अनुसंधान का लेखा जोखा दुनिया भर के जर्नलों के साथ-साथ पुस्तकों के रूप में भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही हर प्रकार के अनुसंधान की जानकारियां नेट पर उपलब्ध होंगी। आचार्य ने बताया कि अनुसंधानशाला के बॉटेनिकल गार्डन को पहली बार विशेषज्ञों के लिए खोला गया। इस केंद्र में अनुसंधान करने के लिए बाहर से भी बाहर से भी वैज्ञानिक समय-समय पर आते रहेंगे, लेकिन गार्डन में प्रवेश सीमित रखा जाएगा। 

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