{"_id":"5c339b97bdec226275079bba","slug":"141546886039-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणित और विज्ञान किट से पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गणित और विज्ञान किट से पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समग्र शिक्षा के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना बजट से जनपद हरिद्वार के 50 माध्यमिक विद्यालयों को गणित और विज्ञान किट दी जाएगी। इनमें 14 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें अब तक एक भी गणित और विज्ञान किट नहीं है। किट मिलने से यहां बच्चों के लिए प्रैक्टिकल करना आसान हो जाएगा।
हरिद्वार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते वर्ष नीति आयोग की ओर से किए गए सर्वे में हरिद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर अति पिछड़े जनपदों में शामिल किया गया था। सरकारी स्कूलों के पिछड़ने का मुख्य कारण स्कूलों में संसाधनों का अभाव भी है। जिस कारण बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा समस्या माध्यमिक के छात्रों को गणित और विज्ञान के प्रैक्टिकल करने में है। शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना बजट 2018-19 के अुनसार 50 विद्यालयों में गणित और विज्ञान किट दी जाएगी। विभाग की प्रत्येक गणित किट की लागत एक हजार 907 और प्रत्येक विज्ञान किट की कीमत 10 हजार 947 रुपये बताई जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि गणित और विज्ञान में प्रयोगात्मक कार्य अधिक होते हैं। इसलिए बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए किट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 14 स्कूल ऐसे हैं, जिनका उच्चीकरण किया गया था, लेकिन यहां किट नहीं है। इन स्कूलों को भी किट दी जाएगी।
विज्ञापन
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समग्र शिक्षा के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना बजट से जनपद हरिद्वार के 50 माध्यमिक विद्यालयों को गणित और विज्ञान किट दी जाएगी। इनमें 14 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें अब तक एक भी गणित और विज्ञान किट नहीं है। किट मिलने से यहां बच्चों के लिए प्रैक्टिकल करना आसान हो जाएगा।
हरिद्वार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते वर्ष नीति आयोग की ओर से किए गए सर्वे में हरिद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर अति पिछड़े जनपदों में शामिल किया गया था। सरकारी स्कूलों के पिछड़ने का मुख्य कारण स्कूलों में संसाधनों का अभाव भी है। जिस कारण बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा समस्या माध्यमिक के छात्रों को गणित और विज्ञान के प्रैक्टिकल करने में है। शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना बजट 2018-19 के अुनसार 50 विद्यालयों में गणित और विज्ञान किट दी जाएगी। विभाग की प्रत्येक गणित किट की लागत एक हजार 907 और प्रत्येक विज्ञान किट की कीमत 10 हजार 947 रुपये बताई जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि गणित और विज्ञान में प्रयोगात्मक कार्य अधिक होते हैं। इसलिए बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए किट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 14 स्कूल ऐसे हैं, जिनका उच्चीकरण किया गया था, लेकिन यहां किट नहीं है। इन स्कूलों को भी किट दी जाएगी।
विज्ञापन